किशनपोल जोन में ‘स्वच्छता’ कागजों तक सीमित: वार्ड 55 और 56 में गंदगी का अंबार, बीमारियों का खतरा बढ़ा
-पार्षद और निगम की अनदेखी से राहगीर और स्थानीय निवासी त्रस्त, डीसी बोले-‘सफाई की शिकायतें बेबुनियाद’
जयपुर (रॉयल पत्रिका) I गुलाबी नगरी को स्वच्छता में नंबर वन बनाने के दावों के बीच किशनपोल जोन के वार्ड नंबर 55 और 56 की स्थिति नारकीय बनी हुई है। रॉयल पत्रिका की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि इन क्षेत्रों में कचरा डिपो ओवरफ्लो हो रहे हैं, सड़कों पर गंदगी पसरी है और मच्छरों के प्रकोप से स्थानीय निवासियों में बीमारियों का डर बना हुआ है।
ग्राउंड जीरो: कचरे के ढेर और लटकते बिजली के तार
वार्ड 55 में मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि कचरा समय पर नहीं उठने के कारण पूरी सड़क गंदगी से अटी पड़ी है। स्थानीय निवासी अयान ने बताया, गंदगी के कारण हमारा स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और राहगीरों को निकलने में भारी दिक्कत हो रही है। वहीं,बच्चों और बुजुर्गों का कहना है कि सफाई कर्मचारी बहुत कम आते हैं और कचरा गाड़ियाँ भी अनियमित हैं। कचरे के अलावा क्षेत्र में बिजली के खुले और टूटे हुए तार भी बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे रहे हैं।
जनता का आरोप: “पार्षद सुनते नहीं, निगम आता नहीं”
स्थानीय लोगों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है। निवासियों का आरोप है कि पार्षद को कई बार शिकायत करने के बावजूद सिर्फ “गाड़ी आ जाएगी” का आश्वासन मिलता है, लेकिन हकीकत में कोई सुनवाई नहीं होती। एक राहगीर ने बदबू और गंदगी पर दुख जताते हुए कहा कि यह स्थिति शहर की छवि को खराब कर रही है। कुछ लोगों ने यह भी माना कि जनता में जागरूकता की कमी है, लेकिन मुख्य समस्या निगम की लापरवाही है।
निगम डीसी का चौंकाने वाला बयान: “शिकायतें सरासर गलत”
जब इन समस्याओं और वार्ड 55-56 की बदहाली को लेकर किशनपोल ज़ोन के उपायुक्त (डीसी) से सवाल किया गया, तो उन्होंने इन तथ्यों को सिरे से खारिज कर दिया। डीसी ने कहा, “यह कहना गलत है कि सफाई नहीं हो रही है। वहां लगातार सफाई जारी है”। जब उन्हें कचरे के ढेर के प्रमाण दिए गए, तो उन्होंने इसे एक ‘सतत प्रक्रिया’ बताते हुए कहा कि सफाई होती है और कचरा फिर आ जाता है। कचरा गाड़ियों की ट्रैकिंग के लिए लगे स्कैनर्स के काम न करने के सवाल पर उन्होंने जानकारी होने से इनकार कर दिया।
बड़ा सवाल: जनता झूठ बोल रही है या अधिकारी?
एक तरफ जहां धरातल पर गंदगी, मच्छर और बदबू से जनता बेहाल है और पार्षद से लेकर निगम तक गुहार लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ ज़ोन के सबसे बड़े अधिकारी इन शिकायतों को ‘बेबुनियाद’ बता रहे हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि अगर अधिकारी हकीकत देखने को तैयार नहीं हैं, तो क्या जयपुर कभी स्वच्छता में नंबर वन बन पाएगा?
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