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नई कैबिनेट में रहेगा सिद्धारमैया का दबदबा… इस्तीफा देकर बेटे के लिए मांगा डिप्टी CM का पद!

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बेंगलुरु। कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। गुरुवार को सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया हैं। शुक्रवार को राज्यपाल ने थावरचंद गहलोत ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके बाद राज्य में डी के शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने जा रास्ता साफ हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डीके अगले हफ्ते नए मंत्रियों के साथ शपथ ले सकते हैं। सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए 4 डिप्टी CM भी बनाए जा सकते हैं।

इधर, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद ही सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अब सिद्धारमैया ने बड़ी डिमांड रख दी है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान के सामने अपने बेटे और MLC यतींद्र सिद्धारमैया को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग रख दी है।

नई कैबिनेट में रहेगा सिद्धारमैया का दबदबा

पार्टी सूत्रों की मानें तो कर्नाटक में नए सीएम का ऐलान के बाद मंत्रिमंडल में भी फेरबदल होगा। कैबिनेट में करीब 15 से 20 नए मंत्री शामिल किए जा सकते हैं। 35 मंत्रियों में से करीब 25 हटाए जा सकते हैं। शिवकुमार कैबिनेट में सिद्धारमैया और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे समेत चार उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना है। यह पहला मौका नहीं है कि किसी राज्य में एक साथ इतने डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे। इससे पहले 2019 में आंध्र प्रदेश के पूर्व CM जगन मोहन ने 5 डिप्टी सीएम के साथ शपथ ली थी। दावा किया जा रहा है कि नए मंत्री डिप्टी सीएम सिद्धारमैया की पसंद के होंगे। इनके नामों पर मुहर लगवाने के लिए ही सिद्धारमैया दिल्ली में सोनिया, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मिले हैं। उनके साथ-साथ डीके शिवकुमार भी दिल्ली पहुंचे।

3 साल पहले रोटेशनल फॉर्मूला से CM बने थे सिद्धारमैया

कर्नाटक विधानसभा के चुनाव परिणाम 13 मई, 2023 को आए थे। कांग्रेस ने AHINDA फॉर्मूले के दम पर चुनाव जीता था। AHINDA का मतलब है, A – अल्पसंख्यक, HI – हिंदुलिदा (पिछड़े वर्ग), DA – दलित। सिद्धारमैया खुद ओबीसी की कुरुबा जाति से आते हैं, इसलिए पिछड़े वर्ग का बड़ा समर्थन कांग्रेस के साथ रहा। सिद्धारमैया ने 135 विधायकों में से 90 का समर्थन का दावा किया था। वहीं, डीके शिवकुमार का दावा था कि उसने पार्टी को मुश्किल दौर से बाहर निकाला। इसके लिए उन्होंने मेहनत की। इसमें लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय ने साथ दिया। दोनों मुख्यमंत्री बनने को लेकर अ‌ड़े रहे। इससे कांग्रेस आलाकमान को मुख्यमंत्री तय करने में 7 दिन लग गए। करीब एक सप्ताह बाद 20 मई को शपथ हो सकी। इस बीच खबरें आईं कि दिल्ली में कई दौर की बैठकों के बाद दोनों के बीच ‘ढाई-ढाई साल के सीएम’ फॉर्मूले पर सहमति बनी। हालांकि कांग्रेस ने इसे आधिकारिक रूप से कभी नहीं माना।

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1400 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं डीके शिवकुमार

कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार देश के सबसे अमीर नेताओं में हैं। उनके पास 1413 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति है। वह रियल एस्टेट, खनन, होटल कारोबारी भी हैं। दिलचस्प ये है कि इतनी संपत्ति के बावजूद उनके चुनावी हलफनामे में एक टोयोटा क्वालिस कार दर्ज है। 263 करोड़ का कर्ज भी है। 1962 में बेंगलुरु के पास कनकपुरा में जन्मे डीके वोक्कालिगा समुदाय से हैं। वह कनकपुरा से ही विधायक हैं। कांग्रेस में उनकी पहचान ऐसे नेता की है जो पार्टी विधायकों को टूटने से बचाते हैं। किसी भी बड़े ऑपरेशन, चुनाव मैनेजमेंट, प्रचार या गुप्त रणनीतियों के लिए जिस वित्तीय और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट की जरूरत होती है, उसे वे बखूबी मैनेज कर लेते हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में जा चुके है तिहाड़

डीके शिवकुमार पर 19 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। ईडी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के दो केस में जांच कर रही है। 2017 में आयकर विभाग के छापे में इनके घर 8.5 करोड़ रु. मिले थे। इसी केस में वह 2019 में गिरफ्तार हुए। उन्हें 50 दिन तिहाड़ में बिताने पड़े थे। सीबीआई आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में जांच कर रही है।

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