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कमाल अमरोही:

जयपुर

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भारतीय सिनेमा के ‘मुगल’, जिन्होंने ‘पाकीज़ा’ और ‘महल’ जैसी शाहकार फिल्में दीं

एक बेहतरीन लेखक और निर्देशक का सफर

मुंबई (रॉयल पत्रिका)। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जिन्होंने कम फिल्में बनाईं, लेकिन जो भी बनाया, वह इतिहास बन गया। ऐसे ही एक फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक थे सैयद अमीर हैदर कमाल नक़वी, जिन्हें दुनिया कमाल अमरोही के नाम से जानती है।

17 जनवरी 1918 को अमरोहा (उत्तर प्रदेश) में जन्मे कमाल अमरोही एक बेहतरीन उर्दू और हिंदी कवि भी थे। उन्होंने अपने करियर में ‘महल’ (1949), ‘पाकीज़ा’ (1972) और ‘रज़िया सुल्तान’ (1983) जैसी यादगार फिल्में दीं।

अमरोहा से मुंबई तक का सफर

1938 में पढ़ाई के लिए लाहौर गए कमाल अमरोही की किस्मत तब बदली जब मशहूर गायक के. एल. सहगल ने उन्हें खोजा और सोहराब मोदी की ‘मिनर्वा मूवीटोन’ कंपनी में काम करने के लिए मुंबई ले आए।

वहाँ उन्होंने जेलर (1938), पुकार (1939) और शाहजहाँ (1946) जैसी फिल्मों के लिए लेखन किया। 1949 में उन्होंने मधुबाला और अशोक कुमार अभिनीत फिल्म ‘महल’ से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। यह फिल्म न केवल एक बड़ी हिट साबित हुई, बल्कि इसने सस्पेंस और संगीत का एक नया दौर शुरू किया।

‘पाकीज़ा’: 14 साल की तपस्या

कमाल अमरोही की सबसे बड़ी पहचान फिल्म ‘पाकीज़ा’ बनी। इस फिल्म की कल्पना 1958 में की गई थी, लेकिन इसे पर्दे पर आने में 14 साल लग गए।

  • यह फिल्म मीना कुमारी के लिए उनकी श्रद्धांजलि मानी जाती है।

  • शुरुआत में यह ब्लैक एंड व्हाइट थी, बाद में रंगीन और फिर सिनेमास्कोप में शूट की गई।

  • 4 फरवरी 1972 को रिलीज़ हुई यह फिल्म आज एक ‘कल्ट क्लासिक’ मानी जाती है।

निजी जीवन: मीना कुमारी और चार शादियां

कमाल अमरोही का निजी जीवन भी फिल्मों की तरह ही उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्होंने चार शादियां की थीं:

  1. बिलकिस बानो: उनकी पहली पत्नी।

  2. सैयदा अल-ज़ेहरा महमूद (महमूदी): जिनसे उनके तीन बच्चे (शानदार, ताजदार और बेटी रुखसार) हुए।

  3. मीना कुमारी: फिल्म ‘तमाशा’ के सेट पर मुलाकात हुई और 14 फरवरी 1952 (वैलेंटाइन डे) को निकाह हुआ। हालांकि, 1964 में वे अलग हो गए, लेकिन ‘पाकीज़ा’ के लिए फिर साथ काम किया।

  4. डॉक्टर: अपने अंतिम वर्षों में उन्होंने अपनी चिकित्सक से चौथी शादी की।

कमालिस्तान स्टूडियो और अधूरी फिल्में

1958 में स्थापित कमाल अमरोही स्टूडियो (कमालिस्तान) मुंबई के जोगेश्वरी में 15 एकड़ में फैला है। यहाँ ‘अमर अकबर एंथोनी’, ‘खलनायक’, ‘कोयला’ और ‘दबंग 2’ जैसी कई बड़ी फिल्मों की शूटिंग हुई।

कमाल अमरोही की एक फिल्म ‘आखिरी मुगल’ अधूरी रह गई थी, जिसे बाद में जेपी दत्ता ने बनाने की कोशिश की लेकिन प्रोजेक्ट बंद हो गया।

निधन और आने वाली बायोपिक

11 फरवरी 1993 को मुंबई में इस दिग्गज निर्देशक का निधन हुआ। उन्हें रहमतबाद कब्रिस्तान में उनकी मुहब्बत मीना कुमारी की कब्र के बगल में दफनाया गया।

जल्द ही दर्शकों को उनकी और मीना कुमारी की प्रेम कहानी पर आधारित एक बायोपिक ‘कमाल और मीना’ (2026 में संभावित) देखने को मिलेगी, जिसका निर्देशन सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा कर रहे हैं और संगीत ए.आर. रहमान देंगे।

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