पिंकसिटी की साख पर ‘गंदगी’ का दाग: जल महल के बाहर पसरी अव्यवस्था
-स्वच्छता के दावों के बीच ‘हेरिटेज’ क्षेत्र में फर्जीवाड़ा; यूपी से आए सैलानियों ने कहा- ‘हमारे यहां से भी बदतर हैं हालात’
जयपुर (रॉयल पत्रिका) I राजस्थान की राजधानी की आन-बान और शान कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध ‘जल महल’ के बाहर इन दिनों पर्यटन नहीं, बल्कि गंदगी और नगर निगम की लापरवाही चर्चा का विषय बनी हुई है। लाखों की संख्या में देश-विदेश से आने वाले सैलानियों को यहाँ कदम-कदम पर कचरे और बदबूदार शौचालयों का सामना करना पड़ रहा है। ‘क्लीन जयपुर-सेव जयपुर’ के नारों के बीच धरातल पर स्वच्छता अभियान दम तोड़ता नजर आ रहा है।
पिंकसिटी की साख पर ‘गंदगी’ का दाग: जल महल के बाहर पसरी अव्यवस्था
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से जयपुर घूमने आए एक युवा सैलानी ने जल महल की अव्यवस्थाओं पर गहरा क्षोभ प्रकट किया। उन्होंने रॉयल पत्रिका से बात करते हुए कहा, “हम इस उम्मीद से आए थे कि गुलाबी नगरी बहुत साफ और सुंदर होगी, लेकिन यहाँ तो हर तरफ गंदगी है। हमारे यूपी में इतनी गंदगी नहीं है जितनी यहाँ जल महल के सामने देखने को मिल रही है।” पर्यटकों का कहना है कि दूर से जल महल खूबसूरत दिखता है, लेकिन पास आने पर नगर निगम की पोल खुल जाती है।
शौचालयों की स्थिति नारकीय: कोर्ट के आदेशों की भी उड़ रही धज्जियां
ग्राउंड जीरो पर की गई पड़ताल में सामने आया कि जल महल के सामने बने सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है। अंदरूनी गंदगी: वाशरूम के अंदर गंदगी का अंबार लगा है, जिससे पर्यटकों का वहां रुकना भी दूभर है।
एक अन्य शौचालय को बाहर से कांटों और लकड़ियों से ढककर बंद कर दिया गया है। सवाल यह उठता है कि यदि उपयोग के लिए नहीं था, तो जनता के पैसे से इसे बनाया ही क्यों गया?
अधिकारियों की चुप्पी: जानकारी के अनुसार, छह महीने पहले कोर्ट ने पाल पर बने इन टॉयलेट्स को बंद करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेशों का उल्लंघन कर इन्हें फिर से खोल दिया गया है।
जिम्मेदारी से भागते अधिकारी: ‘मेरे अंडर नहीं आता’ का रटा-रटाया जवाब जब हमारी टीम ने इस अव्यवस्था पर नगर निगम हेरिटेज और हवा महल ज़ोन के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, तो सभी ने जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल दी। डीसी विजिलेंस और अन्य अधिकारियों का कहना था कि यह क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अधिकारियों की यह ‘टालमटोल’ नीति दर्शाती है कि जयपुर की स्वच्छता केवल कागजों और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गई है।
सफाई कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल
स्थानीय लोगों और सैलानियों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी अपने काम को सही तरीके से अंजाम नहीं दे रहे हैं। नगर निगम के अधिकारी सफाई की फोटो लगाकर जयपुर को नंबर-1 बनाने का दावा तो करते हैं, लेकिन जल महल जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर व्याप्त गंदगी इन दावों को पूरी तरह खारिज करती है। यदि विदेशी सैलानी यहाँ आकर ऐसी स्थिति देखते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जयपुर की छवि क्या बनेगी?

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