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अमेरिका के लिए अफगानिस्तान के बगराम हवाई अड्डे को जबरन कब्जा कर पाना असंभव

जयपुर

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जयपुर (रॉयल पत्रिका)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बगराम एयरबेस को वापस लेने की इच्छा जताई है, लेकिन इसे जबरन कब्जा करना कई कारणों से जटिल और असंभाव्य है। निम्नलिखित बिंदु इसकी स्थिति स्पष्ट करते हैं।

वर्तमान स्थिति और तालिबान का नियंत्रण-

बगराम एयरबेस, जो कभी अफगानिस्तान में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा था, 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान के नियंत्रण में है। तालिबान ने स्पष्ट रूप से अमेरिका की इस मांग को ठुकरा दिया है और किसी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति का विरोध करने की बात कही है। तालिबान के रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने कहा कि वे अगले 20 साल तक लड़ने को तैयार हैं, यदि अमेरिका जबरन कब्जा करने की कोशिश करता है।

कानूनी और नैतिक चुनौतियां-

बगराम पर जबरन कब्जा करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा, क्योंकि यह अफगानिस्तान की संप्रभुता के खिलाफ होगा। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन इस तरह के कदम की निंदा कर सकते हैं, जिससे अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा, यह कदम क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकता है।

सामरिक और रसद संबंधी कठिनाइयां-

बगराम को जबरन कब्जाने और वहां सैन्य उपस्थिति बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य संसाधनों, सैनिकों और रसद की आवश्यकता होगी। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे व्यावहारिक नहीं माना है, क्योंकि बेस को सुरक्षित रखना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। तालिबान के साथ युद्ध दोबारा शुरू करना अमेरिका के लिए महंगा और जोखिम भरा होगा।

ट्रंप की धमकी और रणनीति-

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अगर तालिबान बगराम वापस नहीं करता, तो “बुरा अंजाम” भुगतना पड़ेगा। यह उनकी आक्रामक बयानबाजी का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य तालिबान पर दबाव बनाना या घरेलू समर्थकों को प्रभावित करना हो। हालांकि, यह धमकी वास्तविक सैन्य कार्रवाई की तुलना में राजनैतिक और कूटनीतिक दबाव का हिस्सा प्रतीत होती है।

चीन और भू-राजनीतिक कारण-

ट्रंप ने बगराम की रणनीतिक अहमियत पर जोर दिया, खासकर यह दावा करते हुए कि यह चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम के केंद्र से एक घंटे की दूरी पर है। यह दावा अतिशयोक्तिपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह दर्शाता है कि अमेरिका मध्य एशिया में अपनी सामरिक उपस्थिति को मजबूत करना चाहता है, खासकर चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर नजर रखने के लिए।

अफगानिस्तान और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया-

तालिबान ने न केवल अमेरिका की मांग को खारिज किया, बल्कि यह भी कहा कि वे किसी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे। इसके अलावा, पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां भी इस तरह के कदम का विरोध कर सकती हैं, क्योंकि यह क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है। हालांकि ट्रंप ने बगराम पर दोबारा नियंत्रण की बात कही है, लेकिन इसे जबरन कब्जा करना सैन्य, कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत कठिन और जोखिम भरा होगा। तालिबान का कड़ा रुख, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की संभावित प्रतिक्रिया, और रसद संबंधी चुनौतियां इसे लगभग असंभव बनाती हैं। ट्रंप की यह बयानबाजी उनकी आक्रामक शैली और भू-राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है, लेकिन वास्तव में इसे लागू करना व्यवहारिक नहीं लगता।

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