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इजराईल- ईरान युद्ध अमेरिका के लिए काफी महत्वपूर्ण

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अमेरिका के दोनों हाथों में लड्डू

जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। इजराईल ने अमेरिका के इशारे पर ईरान पर फाइटर जेट, मिसाईलों एवं ड्रोन से हमला कर दिया। इजराईल के हमले में दावा किया गया कि उसने ईरान की परमाणु साईट, सैन्य हैडक्वार्टर एवं तेल r रिफाईनारियों को नष्ट कर दिया। ईरान ने स्वीकार भी किया कि इजराईली हमले में उसके कई सैन्य अधिकारी एवं अन्य की मौत हो गई। दूसरी तरफ ईरान ने भी इजराईल पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। सूचनाओं के अनुसार इजराईली राजधानी तेल अवीव और इजराईल के व्यापारिक केन्द्र हाइफाशहर में ईरानी हमले से काफी नुकसान हुआ है। दोनों ही देश एक दूसरे पर भीषण अटैक कर रहे है। ऐसा लगता है कि इजराईल ईरान युद्ध समय के साथ और भीषणारूप ले सकता है। युद्ध के बीच अमेरिका ने धमकी दी है कि ईरान परमाणु समझौता करे, क्योंकि इजराईल के पास और भी घातक हथियार है। । लेकिन ईरान अमेरिका इजराईल के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं है। वैसे अमेरिका ने कहा है कि इजराईल ने ईरान पर आक्रमण बिना उसकी मर्जी से किया है और इजराईल के साथ अमेरिका युद्ध में शामिल नहीं है। साथ में धमकी दी है कि ईरान ने मिडिल ईस्ट में उसके ठिकानों पर हमला किया तो अमेरिकी फौज ईरान को बर्बाद कर देंगी।

अमेरिका के दोनों हाथों मे लड्डू – वैसे सभी जानते है कि अमेरिका की सैन्य सहायता से इजराईल मुस्लिम देशों पर भारी पड़ता है। इजराईल- अमेरिका किसी भी हालात में ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहते हैं। अमेरिका की विश्व में एक अलग ही नीति हैं। अमेरिका के लिए विश्व में युद्ध होते रहने चाहिए जिससे हथियार बेचकर पैसा कमाया जा सकें। इजराईल के पास बहुत पैसा है, अमेरिका में यहूदी लॉबी जो मिलेनियर है इजराईल की आर्थिक सहायता करती है। इसलिए अमेरिका इस युद्ध में हथियार सप्लाई करके पैसा कमाएंगा। दूसरी तरफ इजराईल, ईरान से युद्ध जीत गया तो इजराईल की जीत का सारा क्रेडिट अमेरिका को ही जाएंगा। यदि इजराईल युद्ध ईरान से हारता है तो भी अमेरिका को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। क्योंकि इजराईल अमेरिका के लिए गले की हड्डी बन गया है। दुनिया के ज्यादातर मुस्लिम देश इजराईल के कारण अमेरिका से दूर जाने लगे हैं। अमेरिका मुस्लिम देशों से नजदीकी बढ़ा लेगा और कहेगा कि मुस्लिम देशों के सम्मान के कारण उसने युद्ध में इजराईल का साथ नहीं दिया। वैसे अमेरिका को इजराईल-ईरान युद्ध में भाग लेने की संभावना कम ही है। क्योंकि अमेरिका के युद्ध में भाग लेते ही रूस, चीन और साउथ कोरिया भी अमेरिका के खिलाफ ईरान का साथ दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में चौतरफा युद्ध की सारी जिम्मेदारी और नुकसान अमेरिका को उठाना पड़ेगा। अमेरिका कभी अकेले नुकसान नहीं उठाता है। लेकिन संभावना यही है कि किसी भी स्थिति से अमेरिका फायदा उठाना चाहेंगा।

 इजराईल को पहली बार इतना बड़ा नुकसान – इजराईल की मिसाईल प्रतिरोधक क्षमता विश्व में सबसे अधिक और शक्तिशाली मानी जाती है। इजराईल की सुरक्षा को अभेदा माना जाता है। उसके पास आयरन डोम, स्टरडॉम एवं अमेरिका का दिया हुआ थॉड सिस्टम है। फिर भी ईरान की मिसाईलो, ड्रोनो ने इजराईल के तेलअवीव शहर और हाईपा शहर में भारी नुकसान पहुंचाया है। ईरान ने इजराईल, हाईफा एअर पोर्ट, तेल डिपों पर मिसाईलो से आक्रमण कर दिया जिससे भारी नुकसान हुआ। यदि ईरान की मिसाईले इजराईल के रक्षा कवच को इसी तरह भेदती रही तो इजराईल का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। वैसे इजराईल और अमेरिका ने ईरान की इस तरह की जबाबी कार्यवाही का अंदाजा नही लगाया था। माना जा रहा है कि जबसे इजराईल बना है, इस तरह का आक्रमणा उस पर पहले कभी नही हुआ है। ईरान और इजराईल के बीच युद्ध काफी खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। इजराईल वैसे तो हमेशा ही युद्ध की स्थिति में रहता है और हमेशा ही युद्ध की तैयारी करता रहता है। लेकिन ईरान की तरह पहले किसी देश ने उसको जबाब नही दिया।

इजराईल और ईरान में कौन भारी – इजराईल और ईरान युद्ध में अभी तक इजराईल का पलड़ा भारी है। इजराईल के पास अमेरिका के दिए हुए एफ-35 फाईटर विमानों की बड़ी संख्या है। है। एफ-35 फाईटर विमान दुनिया के सबसे खतरनाक विमान माने जाते है। इजराईल के पास सटीक मार करने वाली मिसाईले हैं। इसलिए इजराईल-ईरान में सटीक हमले करके नुकसान ज्यादा पहुंचा रहा। अमेरिका अपने राडार और अन्य तकनीकी उपकरणों से सूचना एकत्रित करके इजराईल को जानकानी दे रहा है। फिर भी ईरान की मिसाईल क्षमता कमजोर नहीं है। ईरान की मिसाईले इजराईली रक्षा कवच को भेद कर इजराईल के शहरों में नुकसान पहुंचा रही है। अभी तक यह अंदाजा नही लगाया जा सकता है कि कौन भारी और कौन कमजोर है। कुछ दिनों के युद्ध के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएंगीं। वैसे इजराईल और ईरान दोनों के पास अघोषित परमाणु बम बताए जा रहें हैं। इन दोनों में से किसी ने भी युद्ध में परमाणु बम का प्रयोग कर लिया तो युद्ध की स्थिति बदलने में समय नही लगेगा और भारी जानमाल की हानि होना तय है।

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