ईरान का अमेरिका को खुला चैलेंज:
दुनिया का एकमात्र देश जो सीधे युद्ध के लिए तैयार
ट्रम्प की धमकियों का कोई असर नहीं; तेहरान बोला- हमला हुआ तो खाड़ी में अमेरिकी अड्डे कर देंगे बर्बाद
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका को विश्व का सबसे शक्तिशाली देश माना जाता है। पूरे विश्व में अमेरिका का आर्थिक, राजनीतिक एवं सैन्य मामलों में दखल रहता है। लेकिन ईरान विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जो अमेरिका से सीधे युद्ध की हिम्मत दिखा रहा है।
अमेरिका का दखल और ट्रम्प का नया अंदाज
अमेरिका दुनिया के अधिकतर देशों में अंदर तक दखल देता है और उसके विरोध में चलने वाले दर्जनों देशों के शासनाध्यक्षों को सत्ता से हाथ धोना पड़ा है। आमतौर पर कोई भी देश अमेरिका से सीधी लड़ाई की हिम्मत नहीं रखता।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से पहले अमेरिका की ओर से धमकियां गुप्त एजेंसियों के जरिए दी जाती थीं, लेकिन वर्तमान में यह काम खुद ट्रम्प ने ले रखा है। वे विश्व के एकमात्र ऐसे शासनाध्यक्ष हैं जो कुछ भी छुपाकर नहीं रखते। जो उनके दिल में होता है, वह मीडिया के जरिए तुरंत दुनिया के सामने आ जाता है।
अमेरिकी मनमानी के खिलाफ एकजुट होते देश
अब अमेरिका की नीति सब देशों के सामने आ चुकी है। दूसरी तरफ चीन, रूस, ईरान, उत्तर कोरिया और भारत सहित कई अन्य देश अमेरिका की मनमानी के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं हैं।
जहाँ भी दो देशों के बीच टकराव होता है, ये देश मिलकर अमेरिका के सामने खड़े हो जाते हैं। यही कारण है कि अमेरिका को पिछले दशक में कई मोर्चों पर पीछे हटना पड़ा है या शिकस्त झेलनी पड़ी है।
आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर कमजोर होता अमेरिका
आर्थिक मोर्चे पर अमेरिका तेजी से कमजोर हो रहा है और अपनी जीडीपी से ज्यादा वह कर्जदार हो चुका है। इसके अलावा:
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अमेरिका की आमदनी, जो लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइलों को बेचकर होती थी, काफी कम हो गई है।
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हथियार खरीदने वाले देश अब अमेरिका की बजाय चीन, तुर्की, पाकिस्तान, भारत, फ्रांस और ब्रिटेन से हथियार खरीद रहे हैं।
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इजरायल और यूक्रेन की हार ने अमेरिकी हथियारों की सर्वोच्चता और वर्चस्व की पोल खोलकर रख दी है।
इजरायल-ईरान संघर्ष और परमाणु खतरा
अमेरिका ने इजरायल को शक्तिशाली बनाकर दशकों तक पश्चिमी एशिया के मुस्लिम देशों पर वर्चस्व बनाए रखा, लेकिन इजरायल का ईरान से पिछड़ना अमेरिका के लिए मुसीबत बन गया है। ईरान अब अमेरिका को खुला चैलेंज दे रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब है। यदि ईरान परमाणु बम बना लेता है, तो अमेरिका और इजरायल की मुसीबतें और बढ़ जाएंगी। इसी डर से अमेरिका, ईरान को झुकाने के लिए उस पर आक्रमण करना चाहता है और राष्ट्रपति ट्रम्प लगातार उसे बर्बाद करने की धमकी दे रहे हैं।
अगर युद्ध हुआ तो क्या होगा?
ईरान पर ट्रम्प की धमकियों का कोई असर नहीं है। इसके उलट ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर आक्रमण हुआ, तो खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिका के सभी सैनिक अड्डे बर्बाद कर दिए जाएंगे।
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साथी देश: युद्ध की तैयारी में सिर्फ इजरायल और अमेरिका साथ दिख रहे हैं, जबकि नाटो देश भी अमेरिका का साथ देने से बच रहे हैं।
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मुस्लिम देशों का रुख: अमेरिका के मित्र माने जाने वाले ज्यादातर मुस्लिम देश भी ईरान पर अमेरिकी आक्रमण का विरोध कर रहे हैं।
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वैश्विक ध्रुवीकरण: चीन और रूस पूरी तरह ईरान के साथ खड़े हैं।
जानकारों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका में युद्ध हुआ, तो यह एक भयंकर युद्ध होगा जिससे विश्व के ज्यादातर देश प्रभावित होंगे।
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