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भारत का लोकतंत्र मजबूत, उसे कोई खतरा नहीं भ्रम फैलाने वाली ताकतों से लोग सतर्क रहें- देवनानी

अजमेर

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भारत की लोकतांत्रिक यात्रा वेदों से लेकर संविधान तक

अजमेर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है। भारत के लोकतंत्र को किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। भारत के संविधान की जड़े भी बहुत गहरी हैं। इसे कोई समाप्त नहीं कर सकता है। भारत के लोगों को एकजुट और एकमुखी होकर काम करना होगा ताकि विश्व को एकता का संदेश जाए। देवनानी ने कहा कि कुछ ताकतें जो भ्रम फैला रही हैं उनसे सभी को सतर्क रहना होगा। देवनानी ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा वेदों से लेकर संविधान तक फैली हुई है। यह यात्रा दर्शाती है कि भारत केवल आज का लोकतंत्र नहीं है बल्कि यह उसकी आत्मा में सदियों से बसी एक परंपरा है। देवनानी ने कहा कि भारत वास्तव में लोकतंत्र की जननी है। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष देवनानी रविवार को दिल्ली विधानसभा द्वारा आयोजित स्पीकर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। देवनानी ने कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जिसकी लोकतांत्रिक परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है। यह परंपरा वेदों उपनिषदों और इतिहास में अंकित है। देवनानी ने कहा कि जब विश्व के अन्य भागों में मानव समाज शिकार पर आश्रित था और लोग वृक्षों की छालों से अपने शरीर ढकते थे, उस प्राचीन काल में भारत का वैदिक साहित्य राजनीतिक क्षेत्र और शासन व्यवस्था की अत्यंत परिपक्व अवधारणा से समृद्ध हो चुका था। उन्होंने कहा कि भारत भूमि पर उस युग में ही गणराज्य, लोकतंत्र तथा राष्ट्र की अवधारणा ने केवल विकसित हो चुकी थी, अपितु उनका भू-सांस्कृतिक, भू राजनीतिक तथा सार्वभौम शासन से संबंधित गहन विमर्श भी प्राचीन ग्रंथो में संकलित हो चुका था। देवनानी ने कहा कि वर्तमान में भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहे जाने का आधार केवल इसकी जनसंख्या की विशालता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उसकी लोकतांत्रिक संरचना, परंपरा और व्यापक जनसंख्या में निहित है। उन्होंने कहा कि भारत में संविधान द्वारा स्थापित लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं बल्कि एक जीवन्त सामाजिक अनुशासन है, जो विविधता में एकता, विचारों की स्वतंत्रता, सार्वभौमिक मताधिकार और न्याय प्रियता पर आधारित है।

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