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भारत को अगला चीन बनने का सपना छोड़ देना चाहिए -रघुराम राजन

नई दिल्ली

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आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत की रोजगार क्रिएशन स्ट्रैटेजी के मूल में पारंपरिक विनिर्माण पर निर्भर रहने के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा, एक और चीन के लिए कोई जगह नहीं है।

नई दिल्ली। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में “अगला चीन” बनने का सपना छोड़ देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि वैश्विक परिस्थितियां और इंफ्रा बाधाएं बड़े पैमाने पर, कम लागत वाली फैक्टरी-आधारित बढ़ोतरी को लगातार असंभव बना रही हैं।

क्या है डिटेल

फ्रंटलाइन के साथ एक डिटेल इंटरव्यू में राजन ने भारत की रोजगार क्रिएशन स्ट्रैटेजी के मूल में पारंपरिक विनिर्माण पर निर्भर रहने के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा, “एक और चीन के लिए कोई जगह नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तेजी से स्वचालित, संरक्षणवादी होता जा रहा है और वियतनाम तथा चीन जैसे देशों द्वारा संतृप्त होता जा रहा है, जहां कम वेतन के साथ मजबूत इंफ्रा भी है। असेंबली जैसे कम-कौशल वाले क्षेत्रों में भी मशीनों को तेज़ी से अपनाया जा रहा है। राजन ने कहा, “कंपनियों को अब ऐसे लोगों की जरूरत है जो मशीनों की देखभाल कर सकें, उनकी मरम्मत कर सकें-न कि ऐसे लोगों की जो मशीनों द्वारा प्रतिस्थापित किए गए मैनुअल काम करें।” बढ़ते वैश्विक विनिर्माण राष्ट्रवाद ने समस्या को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, “हर कोई अपना छोटा-मोटा विनिर्माण उद्योग चाहता है। हम विनिर्माण क्षेत्र में इतनी नौकरियों की उम्मीद नहीं कर सकते।”

राजन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी आर्थिक प्रगति के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। गिरते निर्भरता अनुपात और विशाल युवा कार्यबल के साथ, भारत को अपने तथाकथित जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाना चाहिए। फिर भी, उनका तर्क है कि देश “निम्न पृथ्वी की कक्षा” में फंसा हुआ है, जहां 6-6.5% की निरंतर लेकिन अपर्याप्त वृद्धि दर है- जो ऐतिहासिक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन इतनी नहीं कि बुढ़ापा आबादी पर हावी होने से पहले अमीर बन जाए, खासकर तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में जहां प्रजनन दर पहले ही प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है। (साभार)

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