भारत के पास भरोसे के दोस्तों की कमी दिखाई दे रही है!
रूस-यूक्रेन का युद्ध हुआ तो रूस के साथ चीन, ईरान, उत्तर कोरिया सहित अन्य देश साथ दिखाई दिए। इसी तरह यूक्रेन के साथ नाटो देशों की बड़ी संख्या साथ खड़ी थी। अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच दो-तीन वर्ष पहले युद्ध हुआ तो अजरबैजान के साथ तुर्की, पाकिस्तान साथ खड़े थे और अर्मेनिया के साथ फ्रांस सहित अन्य देश खड़े थे । इजरायल ईरान में संघर्ष पहले से चल रहे थे। अब युद्ध चल रहा है इसराइल के साथ अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से साथ खड़े हैं। इसी तरह ईरान के साथ चीन, रूस, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान दिखाई दे रहे हैं। लेकिन जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ तो भारत के साथ कोई भी देश खड़ा दिखाई नहीं दिया, एकमात्र देश इजराइल ने जरूर भारत के पक्ष में बयान दिए । भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी के दोस्त और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत के पक्ष में कोई बयान नहीं दिया और जब भारत युद्ध में पाकिस्तान पर भारी पड़ने लगा तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालकर युद्ध रोकने पर मजबूर कर दिया । बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनेक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का उपवास बढ़ाया । भारत का हमेशा सच्चा और भरोसे का दोस्त रहा रूस भी भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय तटस्थ रहा। दूसरी तरफ आतंकवादियों की फैक्ट्री माना जाने वाले पाकिस्तान के साथ तुर्की, अज़रबैजान खुलकर साथ रहे थे । अब यह सोचने की बात है कि पहले भारत का दोस्त रूस हुआ करता था, रूस ने हर मुसिबत में चाहे वह युद्ध की स्थिति हो या फिर संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी मामले पर वीटो करने का अवसर हो, भारत के साथ दिया । लेकिन वही रूस अब भारत के साथ सिर्फ व्यापारिक संबंध रखना चाहता है। अब ऐसा क्या हो गया कि भारत के पास एकमात्र इजरायल के अलावा कोई दूसरा देश दोस्त नहीं है। भारत के प्रधानमंत्री क्यों इसराइल को सबसे ज्यादा तरजीह देते हैं। इसराइल के खिलाफ विश्व में 50 से ज्यादा मुस्लिम देश हैं, फिर भी मुस्लिम देशों से ज्यादा मोदी सरकार ने इसराइल को तरजीह दी। अब जब इजराइल का ईरान के साथ युद्ध चल रहा है तो भारत इजराइल का भी खुलकर साथ नहीं दे रहा और प्रधानमंत्री दोनों को युद्ध से बचने की सलाह दे रहे हैं। भारत की यही नीति दोस्त बनने में आड़े आ रही है। देश के प्रधानमंत्री सैंकड़ों देशों की यात्रा कर चुके हैं और सभी से अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं। लेकिन नाराज किसी का नहीं करना चाहते हैं। यह भी माना जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक व्यापारी की तरह देश चला रहे हैं, सभी से अच्छे संबंध रखते हैं। रूस यूक्रेन युद्ध में रूस को अपेक्षा थी कि भारत उसका साथ देगा, लेकिन भारत ने अमेरिका से संबंध खराब होने के डर से साथ नहीं दिया। देशों के बीच दोस्ती जब होती है जब बुरी स्थिति में एक दूसरे का साथ दिया जाए जैसे ईरान ने रूस का साथ दिया तो आज रूस ईरान के साथ युद्ध में खड़ा दिखाई दे रहा है । इसलिए भारत की लीडरशिप के लिए जरूरी है कि विश्व में कुछ देशों के साथ दोस्ती की जाए जो बुरे वक्त में काम आए। क्योंकि भारत देश अभी इतना शक्तिशाली नहीं हुआ जो पड़ोसी देशों और विश्व के देशों को अपनी बात मनवा सके। भारत जब तक शक्तिशाली देश बन भी नहीं सकता, जब तक देश के भीतर नफरत की राजनीति चलती रहेगी और धार्मिक उन्माद बढ़ता रहेगा। भारत को शक्तिशाली बनने के लिए आधुनिक शिक्षा, विकास की राजनीति और धर्म निरपेक्ष राजनीति की जरूरत है।
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