मशीनों के दौर में हाथ का हुनर जिंदा रखे हुए हैं आरी-तारी के फनकार नौशाद खान
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। जयपुर की गलियों में, जहाँ हर नुक्कड़ पर हस्तशिल्प की खुशबू तैरती है, वहीं एक कोने में नौशाद खान अपनी मेहनत और मोहब्बत से एक विरासत बुन रहे हैं। पिछले बीस बरस से, आरी-तारी और जरदोजी की महीन कलाओं में नई जान फूंकते हुए, वे खामोशी से एक बड़ा काम कर रहे हैं। नौशाद खान को यकीन है कि वक़्त चाहे जितनी तेज़ी से बदले, मशीनें आएं या जाएं, लेकिन इंसानी हाथों का हुनर कभी फीका नहीं पड़ेगा। वह मुस्कुराते हुए कहते हैं कि मशीनें आएंगी-जाएंगी, लेकिन हाथ का काम अमर रहेगा।
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद ज़िले के शमशाबाद कस्बे में जन्मे नौशाद खान का रिश्ता जरदोजी से पुश्तैनी है। वे बताते हैं कि उनके दादा हबीबुल्लाह खान से शुरू हुआ यह सिलसिला उनके वालिद आलम खान तक पहुँचा और फिर उन्होंने इस विरासत को संभाला। करीब 20 साल पहले जयपुर आए नौशाद खान के पास सिर्फ हुनर था, लेकिन आज उनकी कला फैशन इंडस्ट्री से लेकर धार्मिक मंचों तक अपनी पहचान बना चुकी है। नौशाद खान का काम साधारण कपड़ों को शाही लिबास में बदल देता है। पहले जहां केवल सलमा, नक्शी, गोटा और दबका का इस्तेमाल होता था, आज उनके डिजाइनों में आर्टिफिशल स्टोन, डायमंड, मोती, टू प्लेट और यहां तक कि ट्यूबलाइट तक का प्रयोग देखने को मिलता है। वे पहले स्केच बनाते हैं, फिर सूई से गुदाई कर डिज़ाइन को कपड़े पर उतारते हैं। कई डिज़ाइनों को पूरा करने में एक हफ्ते से लेकर महीनों तक का समय लग जाता है।
- धार्मिक और राजनीतिक प्रतीकों को भी दिया जीवन
नौशाद का काम लहंगे, साड़ियों और शेरवानी तक सीमित नहीं है। उन्होंने अजमेर दरगाह के नाज़िम और पूर्व डीआईजी बिलाल खान को ख्वाजा गरीब नवाज के गुंबद की कढ़ाईदार आकृति भेंट की है। साथ ही, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए कांग्रेस का हाथ चिन्ह, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए साइकिल और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के लिए कमल का फूल भी आरी-तारी में गढ़ चुके हैं। ये सभी प्रतीक आज भी प्रमुख लोगों के दफ्तरों की शान बने हुए हैं।
- देश-दुनिया में जयपुर के कारीगर का डंका
नौशाद खान का हुनर न केवल देशभर में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। वे भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय, राजस्थान संस्कृति विभाग, सिटी पैलेस, प्रिंसेस दिया कुमारी फाउंडेशन, जवाहर कला केंद्र और नायाब हुनर हाट जैसे मंचों पर लाइव डेमो दे चुके हैं। अमेरिका, यूरोप और लंदन से आए पर्यटक भी उनके कार्य के प्रशंसक रहे हैं। अब तक उन्हें 26 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। दिल्ली स्टेट उर्स कमेटी, मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल्स, भव्या फाउंडेशन और राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री सहित कई संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, गोविंद डोटासरा और पूर्व जल मंत्री महेश जोशी भी उनकी कला की तारीफ कर चुके हैं।
नौशाद खान का सपना है कि पारंपरिक हाथ के काम को डिजिटल युग में भी नया प्लेटफॉर्म मिले। वे अब तक 1000 से अधिक विद्यार्थियों को मुफ्त प्रशिक्षण दे चुके हैं और कई कॉलेजों व वर्कशॉप्स में लाइव डेमो कर चुके हैं। उनका लक्ष्य एक स्थायी प्रशिक्षण केंद्र खोलने का है, जहां युवा पीढ़ी को आरी-तारी व जरदोजी की बारीकियों में निपुण किया जा सके। साथ ही वे डिजाइनों को डिजिटल फॉर्मेट में संरक्षित करने की योजना भी बना रहे हैं।
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।

नौशाद का काम लहंगे, साड़ियों और शेरवानी तक सीमित नहीं है। उन्होंने अजमेर दरगाह के नाज़िम और पूर्व डीआईजी बिलाल खान को ख्वाजा गरीब नवाज के गुंबद की कढ़ाईदार आकृति भेंट की है। साथ ही, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए कांग्रेस का हाथ चिन्ह, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए साइकिल और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के लिए कमल का फूल भी आरी-तारी में गढ़ चुके हैं। ये सभी प्रतीक आज भी प्रमुख लोगों के दफ्तरों की शान बने हुए हैं।