बिहार विधानसभा चुनाव में भारत पाकिस्तान युद्ध और जाति जनजणना के मद्दे मुख्य भूमिका निभाएंगे
- भारत पाकिस्तान युद्ध विराम के बाद अब देश के राजनीतिक दलों के बीच राजनीतिक युद्ध शुरू
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। भारत पाकिस्तान का युद्ध शुरू होते ही विपक्षी दलों ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर दी है और कहा है कि सरकार को संसद में बताना चाहिए कि अमेरिका के दबाव में युद्ध क्यों रोका गया जबकि भारत युद्ध जीत रहा था। कांग्रेस, समाजसेवी पार्टी, शिवसैना (उद्धव) एवं राजद ने सरकार से सवाल पूछना शुरू कर दिया है, कि प्रधानमंत्री बताए कि युद्ध रोकने की क्या जरूरत थी, जबकि भारतीय सैना जीत की ओर अग्रसर थी। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री एवं रक्षामंत्री ने कहा है कि सभी ने जान लिया है कि भारत में आतंक फैलाने वालों का क्या हशर हो सकता है। अब- क्योंकि युद्ध नहीं हो रहा है लेकिन देश की राजनीति का मुद्दा भारत-पाक युद्ध ही रहने वाला है।
बिहार विधानसभा चुनाव-
बिहार में विपक्षी पार्टियां काफी मजबूत स्थिति में हैं। बिहार एक ऐसा प्रदेश है जहां दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की करीब 80 प्रतिशत जनसंख्या है। मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनतादल के अध्यक्ष तेजस्वी यादव पहले से ही बिहार में जाति जनगणना को मुद्दा बनाऐं हुए हैं। और जाति जनजणना का मुद्दा विधानसभा में मुख्य मुद्दा रहने वाला है। वैसे केन्द्र की मोदी सरकार ने देश में जातिगत जनगणना की घोषणा पहले ही कर दी है। जातिगत जनगणना की घोषणा भाजपा को कितना फायदा पंहुचाएगी कहा नहीँ जा सकता है लेकिन यह जरूर है कि बिहार में जातिगत ध्रुवीकरण तेजी से हो सकता है। भारत पाकिस्तान युद्ध के कारण धार्मिक ध्रुवीकरण कम हो सकता है, क्योंकि देश के सभी समुदायों ने पाकिस्तान के विरोध में एकजुकता दिखाई है। धार्मिक ध्रुवीकरण कम होने का किस राजनीतिक दल को फायदा नुकसान होगा कहा नहीं जा सकता है? बिहार विधान सभा चुनाव में अब कुछ महीने ही बचें हैं, बिहार देश का बड़ा प्रदेश है और यहां पर जीत-हार राजनीतिक दलों के लिए काफी महत्व रखती है। इसके अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और भाजपा कांग्रेस का राजरनीतिक दलों के साथ गठबंधन भी बिहार विधानसभा चुनाव में काफी अहमियत रखने वाला है।
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