महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों की समीक्षा में अहम फैसले
- 800 से ज्यादा स्कूल समीक्षा के घेरे में
जयपुर। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू किए गए महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की समीक्षा के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक हाल ही में आयोजित की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या बहुत कम है, उन्हें दूसरे रूप में परिवर्तित किया जाएगा। साथ ही, इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पास के अन्य अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में स्थानांतरित कर प्रवेश दिलाने पर भी विचार किया गया है। बुधवार को सचिवालय में कमेटी के संयोजक डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में हुई बैठक में सदस्य मदन दिलावर, सुमित गोदारा और गजेंद्र सिंह खींवसर भी मौजूद रहे। इसके अलावा स्कूल शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक के बाद डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिन अंग्रेजी स्कूलों में कक्षा कक्ष 10 या उससे से कम विद्यार्थी हैं, उन स्कूलों को हिंदी मीडियम में मर्ज किया जाएगा। साथ ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चों को नजदीकी महात्मा गांधी स्कूलों में प्रवेश दिलवाया जाएगा और उन्हें ट्रांसपोर्ट वाउचर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि समीक्षा के दौरान करीब 800 से ज्यादा विद्यालय ऐसे पाए गए हैं, जिनमें कक्षा कक्षा 10 से कम बच्चे हैं। अगली बैठक में अधिकारियों को पूरी तैयारी के साथ आने के निर्देश भी दिए गए हैं और यह भी पता लगाने को कहा गया है कि इससे कितने विद्यार्थी प्रभावित होंगे। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि कांग्रेस ने आनन फानन में स्कूल तो परिवर्तित कर दिए लेकिन उसमें एक भी पद सृजित नहीं किया और एक भी कक्ष नहीं बनाया। हिंदी माध्यम के स्कूलों से टीचर हटाकर अंग्रेजी माध्यम में लगा दिए, जिससे हिंदी माध्यम के बच्चों की भी पढ़ाई भी प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने बच्चों का भविष्य बर्बाद कर दिया था। अब हम स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहे हैं और जो रिक्त पद हैं उन्हें भी भरा जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार का प्रयास रहेगा कि जो बच्चे अंग्रेजी माध्यम में ही अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, उन्हें पास के किसी अन्य अंग्रेजी माध्यम स्कूल में सहज रूप से प्रवेश दिलाया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों को किसी तरह की असुविधा न हो। इसके लिए स्कूलों में लाइब्रेरी सहित अन्य आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में वर्तमान में कुल 3737 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिन्हें पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू किया गया था।
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