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वक्फ संशोधन विधेयक 2024 लागू करने से भारत की धर्मनिरपेक्षता एवं सामुदायिक एकता पर प्रभाव पड़ेगा: मोहम्मद शोएब

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जयपुर (रॉयल पत्रिका)। वक्फ संशोधन विधेयक 2024, जिसे हाल ही में संसद में प्रस्तुत किया गया, भारत के वक्फ संस्थानों और उससे जुड़े समुदायों के अधिकारों और स्वायत्तता को कमजोर करने वाला प्रतीत होता है। यह विधेयक न केवल वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता को सीमित करता है, बल्कि भारत के संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन भी करता है। उक्त बात प्रदेश कॉंग्रेस कमेटी के सचिव मोहम्मद शोएब ने कही। शोएब ने कहा कि वक्फ बिल में किसी तरह का संशोधन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने विधेयक के कुछ आपत्तिजनक बिंदु साझा किए।

विधेयक के मुख्य आपत्तिजनक बिंदु:

वक्फ संपत्तियों का अधिग्रहण:

प्रस्तावित संशोधनों में सरकार को वक्फ संपत्तियों पर अधिक अधिकार प्रदान करने का प्रावधान है। यह वक्फ संपत्तियों के मूल उद्देश्य और उनकी संरक्षित स्थिति का उल्लंघन है। वक्फ संपत्तियां धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए होती हैं, और उनका सरकारी अधिग्रहण समुदाय के विश्वास को ठेस पहुंचाएगा।

स्वायत्तता पर प्रहार:

वक्फ बोर्ड, जो अब तक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्थान रहे हैं, उनके प्रशासनिक अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम इन संस्थानों की कार्यक्षमता और समुदाय की भागीदारी पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।

सामुदायिक अधिकारों का हनन:

विधेयक में ऐसे प्रावधान हैं जो वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों के समाधान के लिए स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करते हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदायों की कानूनी सुरक्षा कमजोर होगी।

अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं की उपेक्षा:

यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और उनके धार्मिक संस्थानों के प्रति संवैधानिक संरक्षण का उल्लंघन करता है। इससे समुदायों में असुरक्षा की भावना और अधिक बढ़ेगी।

शोएब ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लागू करने से भारत की धर्मनिरपेक्षता और सामुदायिक एकता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। हम मांग करते हैं कि इस विधेयक को तुरंत वापस लिया जाए, साथ ही वक्फ बोर्डों और अन्य संबंधित संस्थानों से व्यापक चर्चा और परामर्श किया जाए, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए नए विकल्प तलाशे।

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