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धार्मिक भावनाओं का सम्मान तो क्यों बंद नहीं हुई शराब की दुकान

सांगानेर

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आस्था तो बहाना है मुसलमानों को डराना है

सादिक हिन्दुस्तानी

सांगानेर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान की भजनलाल सरकार नए-नए अच्छे-अच्छे फैसले लेकर जनता की भलाई के लिए, राजस्थान की प्रगति के लिए पूर्ण योगदान देने की कोशिश कर रही है।और उनके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई देने लगे हैं। धीरे-धीरे काम धरातल पर दिखाई देते हुए नजर आएंगे। 5 साल में बहुत कुछ बदलने वाला है। और जो कभी नहीं हुआ था। वह भी होने वाला है। सरकार का फैसला!सोच अपनी-अपनी! इस पर चिंतन करना बहुत जरूरी है। राजस्थान सरकार के द्वारा इस वर्ष एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। बूचड़खाने, मांस, मछली, अंडे की दुकानों को बंद रखने का। सरकार का कहना है कि धार्मिक संगठन एवं श्रद्धालुओं की मांग पर और आस्था के नाम पर जो अभी तक राजस्थान में किसी भी सरकार द्वारा नहीं लिया गया था। फिर भी इस  सरकार के द्वारा फैसला लिया गया। फिर भी लोगों ने खास तौर से मुस्लिम समाज ने राजस्थान सरकार का सराहनीय कदम माना। लेकिन,आधा अधूरा होने के कारण गरीबों के दिलों को जख्मी कर गया। 27 अगस्त 2025 पर्यूषण पर्व जैन समाज से संबंधित है। जबकि गणेश चतुर्थी को पूरा हिंदुस्तान जानता है। उसका उल्लेख नहीं किया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि, जैन समाज को खुश करने के लिए यह कदम उठाया गया है।ऐसा लोगों का कहना है। दूसरा 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी है। जिस पर कभी भी प्रदेश में बूचड़खाने,मांस, मछली ,अंडे की दुकानें बंद नहीं हुआ करती थी। धार्मिक भावना की आड़ में गरीबों को आर्थिक रूप से मारा जा रहा है। क्योंकि मीट और अंडे की दुकानें खास तौर से गरीब तबके के लोगों की हैं। 2 दिन की बंदी सीधे जेब पर अटैक करती हैं। दूसरी तरफ शराब कारोबार एवं ठेकों से सरकार को करोड़ों की रॉयल्टी मिलती है। अमीरों की शराब की दुकानों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। जबकि लड़ाई ,झगड़े और गृह क्लेश की जड़ शराब है। उसको छूट दी गई है। यह समझ से परे है। प्रदेश की जनता राजस्थान सरकार के इस निर्णय पर,मनसा पर,संदेह प्रगट कर रही है। सरकार की आस्था पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है। जनता सरकार के इस निर्णय को ईमानदारी की कसौटी पर आधा अधूरा मान रही है। अब सवाल खड़ा होता है कि आस्था की विनय पर क्या राजस्थान सरकार सभी की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करेगी! क्या 5 तारीख को मुस्लिम समाज के त्यौहार मिलाद- उन- नबी पर शराब की दुकानों पर प्रतिबंध लगाएगी ! सरकार से सवाल बनता है कि जो कदम देश समाज और धर्म के नाम पर उठाया गया है। वह तब ही पूरी तरह सार्थक होगा। जब इस की संवेदनशीलता हर वर्ग, हर बुराई, और हर व्यक्ति के लिए समान हो। चाहे वह गरीब हो या मजदूर हो या शराब कारोबारी हो। अब देखने की बात यह है कि देश की राजनीतिक पार्टियां आस्था के नाम पर जनता को इसी तरह गुमराह कर राजनैतिक रोटियां सेंकती रहेगी। या सभी धर्म की आस्था का सम्मान करेंगी।

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