मोदी सरकार की डबल पॉलिसी के चलते भारत कैसे बनेगा विकसित देश !
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान की भजनलाल सरकार प्रदेश को विकसित बनाने के लिए यहां बड़े उद्योग लगाना चाहती है, बिजली, सड़कों का सुदृढ़ ढ़ाचा तैयार करना चाहती है, सभी को शिक्षा के लिए आधुनिक स्कूल, कॉलेज एवं संस्थाए खोलना चाहती है। आधुनिक कृषि के लिए नवीनतम कृषि तकनीक अपनाना चाहती है। इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंत्रियों एंव सरकार के आला अधिकारियों ने देश विदेश के निवेशकों को जयपुर में बुलाने के लिए राईजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया। जिसमें देश विदेश के निवेशक बढ़ी तादाद में आये और राजस्थान प्रदेश में निवेश करने में रूचि दिखाई। समिट का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उदघाटन किया और निवेशको से राजस्थान और देश की आर्थिक गतिविधियों में भागीदार बनने का आव्हान किया। मोदी सरकार 2027 तक देश की अर्थव्यवस्था जीडीपी पांच ट्रिलियन तक पहुंचाना चाहती है। लेकिन मोदी सरकार के प्रयास पांच ट्रिलियन की जीडीपी पहुंचाने के लिए पर्याप्त दिखाई नही दे रहे है। यदि मोदी सरकार वास्तविक रूप से देश का विकास करना चाहती है तो लोकसभा और विधानसभा चुनावों देश के विकास को मुददा क्यो नही बनाती है। भाजपा ने देश में एक भी चुनाव रोजगार, शिक्षा, भ्रष्टाचार के मुददो पर नही लड़ा। भाजपा जैसे जैसे चुनाव नजदीक आता है देश में साम्प्रदायिक माहौल बनाना शुरू कर देती है। ऐसे में देशी और विदेशी निवेशकों में डर पैदा हो जाता है। निवेशकों को दुनिया का सबसे समझदार व्यक्ति माना जाता है। निवेशक अपनी पूंजी की सुरक्षा चाहते है। साम्प्रदायिक माहौल, दंगे-फसाद एवं सामाजिक टकराव निवेशकों और आर्थिक गतिविधियों के लिए ठीक नही माना जाता है।
संभल जामा मस्जिद एवं ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह अजमेर शरीफ जैसे मुददे निवेशकों को चिंता में डालने वाले है।
वर्तमान में देश में मस्जिदों, दरगाहों के अन्दर हिन्दूओं के प्रिय देवी देवताओं की मूर्तिया, मन्दिर खोजने का चलन चलने लगा है। जिससे मुस्लिम समुदाय देश भर में असहजता महसुस करने लगा है। उत्तर प्रदेश में संभल की जामा मस्जिद के अन्दर मन्दिर होने के लिए निचली अदालत में अर्जी दाखिल की गई। माननीय जज साहब ने बिना दूसरे पक्ष के सुने तुरंत जामा मस्जिद का सर्वे करने का आदेश पारित कर दिया। नतीजन संभल में मुस्लिम समुदाय एवं पुलिस के बिच झड़पे हुई जिसमें सैकड़ो लोग घायल हुए और पांच लोगों की गोली लगने से मौत हो गई। ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह अजमेर को करोड़ो मुस्लिम और हिन्दू दिलोजान से चाहते है। यहां किसी भी तरह का बदलाव पूरे देश में बड़ा बवाल खड़ा कर सकता है। देश में अफरा तफरी मच सकती है। क्या ऐसे माहौल के लिए देश विदेश के बड़े निवेशक अपनी पूंजी प्रदेश एवं देश में लगाने के लिए तैयार होगें।
शांति एवं सदभाव का माहौल बनाने की जरूरत –
देश में अयोध्या मामले के बाद अब किसी मस्जिद एवं दरगाह में शिवलिंग ढूढने की जरूरत नही होनी चाहिए। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि हर मस्जिद मे शिवलिंग ढूढना उचित नही है। हमे देश में मिलजुलकर रहना है। मोदी सरकार के लिए भी यही उचित रहेगा कि साम्प्रदायिक माहौल देश बना रहे। निवेशक हमेशा शांति एवं सोहार्द का माहौल चाहता है। अगर प्रदेश और देश में बड़े उद्योग एवं कारखाने लगाए जाते है और निर्यात बढ़त है तो देश आर्थिक रूप से मजबूत होगा और 1947 तक भारत विकसित का मोदी का सपना साकार होगा।लेकिन इसके लिए मन्दिर-मस्जिद की राजनीति करने वालों को नियत्रिंत करने की जरूरत है। अमेरिका,रूस एवं चीन में कही कही भी साम्प्रदायिक माहौल खराब नही होता है। यही कारण है कि यह देश भारत से बहुत आगे है। इसलिए जरूरी है कि देश और सभी प्रदेशो में शांति का माहौल बनेगा तो औद्योगिक एवं आर्थिक गतिविधियों मे तेजी आएगी एवं भारत देश 1947 तक विकसित बन जाएगा।
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