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प्रदूषण में घर के अंदर कैसे सुरक्षित रहें

नई दिल्ली

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जब घर के भीतर भी वही जहरीली हवा घुस रही है?

डॉक्टर ने बताया असली वजह

दिल्ली-एनसीआर में हवा लगातार खराब होती जा रही है। AQI कई बार 400–500 के पार चला जाता है। ऐसे माहौल में लोग समझते हैं कि घर के अंदर रहना सुरक्षित है, बच्चे बाहर न जाएं तो सेहत बची रहेगी, स्कूलों को ऑनलाइन कर देना ही बेहतर है। लेकिन असल सवाल यही है—जब बाहर की हवा ज़हरीली है तो क्या घर के अंदर हम सचमुच सुरक्षित हैं? और अगर वही हवा खिड़कियों और दरवाज़ों से आपके कमरों में घुस रही है, तो फिर घर में रहने का फायदा क्या?

इसी भ्रम को दूर करते हुए डॉक्टर कुनाल बहरानी (चेयरमैन एवं ग्रुप डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी, यथार्थ अस्पताल, फरीदाबाद) बताते हैं कि प्रदूषण सिर्फ आउटडोर का मसला नहीं है, बल्कि इनडोर में भी उतना ही खतरनाक है। कई बार तो घर के अंदर की हवा बाहर से भी ज्यादा दूषित पाई जाती है।

घर के अंदर भी क्यों मौजूद रहती है ज़हरीली हवा?

डॉक्टर के अनुसार, बाहर की हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण इतने छोटे होते हैं कि वे:

  • खिड़कियों के रंध्रों से,

  • दरवाज़ों के गैप से,

  • वेंटिलेशन स्पेस से,

  • यहां तक कि एसी के फ़िल्टर से भी आराम से अंदर आ जाते हैं।

यानी आप चाहे जितनी कोशिश कर लें, घर और बाहर की हवा पूरी तरह अलग नहीं हो सकती।

इनडोर प्रदूषण के स्रोत

इतना ही नहीं, घर के अंदर भी अनेक सोर्स ऐसे हैं जो प्रदूषण को और बढ़ा देते हैं:

  • किचन में गैस चूल्हा

  • अगरबत्ती, धूप, मोमबत्ती

  • धूल और मिट्टी

  • पेंट, फर्नीचर से निकलने वाले कैमिकल्स

  • पालतू जानवरों की डेंडर

  • ह्यूमिडिटी बढ़ने पर फफूंद (mold)

जब बाहर की गंदी हवा और घर के अंदर के ये सभी प्रदूषक मिल जाते हैं, तो इनडोर एयर क्वालिटी कई गुना खराब हो जाती है। बंद कमरों में जहां हवा का सर्कुलेशन कम होता है, वहां ये कण कई-कई घंटे तक रुके रहते हैं। इससे न सिर्फ सांस, बल्कि दिमाग पर भी लगातार बुरा असर पड़ता है।

इनडोर प्रदूषण का दिमाग पर सीधा हमला

डॉक्टर बहरानी बताते हैं कि इनडोर एयर पॉल्यूशन सिर्फ फेफड़ों को नहीं, बल्कि ब्रेन हेल्थ को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

  • नर्व इन्फ्लेमेशन: अल्ट्रा-फ़ाइन पार्टिकल्स खून के जरिए दिमाग तक पहुंच जाते हैं और न्यूरॉन में सूजन पैदा करते हैं। इससे: सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, माइग्रेन, थकान जैसी शिकायतें बढ़ जाती हैं।

  • कॉग्निटिव स्लोडाउन: अध्ययन बताते हैं कि प्रदूषण से: IQ कम होता है, मेमोरी कमजोर होती है, फोकस घटता है। बच्चे और बुजुर्ग जल्दी प्रभावित होते हैं, यानी सोचने और फैसला लेने की क्षमता पर भी असर पड़ता है।

  • हार्मोनल बदलाव और मूड समस्याएं: प्रदूषित हवा शरीर के स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाती है, जिससे: एंग्ज़ायटी, मूड स्विंग्स, नींद में कमी, जैसी परेशानियां सामने आती हैं।

  • खतरनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का जोखिम: लंबे समय तक खराब हवा से संपर्क रहने पर: अल्जाइमर, पार्किंसन जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

क्या वाकई घर के अंदर रहना सुरक्षित है?

डॉक्टर के अनुसार, घर का अंदरूनी माहौल तभी सुरक्षित बन सकता है जब आप इनडोर एयर को साफ करने के लिए उचित इंतज़ाम करें। यहां सबसे प्रभावी तरीका है— HEPA + Activated Carbon फ़िल्टर वाला एयर प्यूरीफायर। इसे रोज़ कम से कम 8–10 घंटे चलाना चाहिए। यह बाहर से आने वाले PM2.5, धूल, गैस, कैमिकल्स और स्मोक को फिल्टर करता है।

घर में प्रदूषण से बचने के तरीके — डॉक्टर द्वारा सुझाए गए

  • एयर प्यूरीफायर: 2–3 लेयर फ़िल्टर वाला चुनें, HEPA फ़िल्टर, Activated Carbon, Pre-filter, इन्हें नियमित रूप से साफ करते रहें।

  • खिड़कियां कब खोलें?: डॉक्टर बताते हैं कि खिड़कियां खोलने का सही समय सुबह 11 बजे से शाम 3 बजे के बीच है। इस समय AQI अपेक्षाकृत बेहतर होता है।

  • किचन में कुकिंग के दौरान चिमनी और एग्जॉस्ट ज़रूर चलाएं: कुकिंग इनडोर PM2.5 को कई गुना बढ़ा देती है।

  • घर में मोमबत्ती, अगरबत्ती और धूप न जलाएं: ये बारीक कण और जहरीले केमिकल छोड़ते हैं।

  • इनडोर प्लांट की सच्चाई: बहुत से लोग सोचते हैं कि पौधे कमरे की हवा को साफ कर देते हैं। डॉक्टर कहते हैं—यह मिथक है। पौधों से थोड़ी ऑक्सीजन मिलती है, लेकिन प्रदूषण कम नहीं होता।

  • धूल, नमी और पानी का संतुलन बनाए रखें: जहां भी नमी ज्यादा होती है, वहां फफूंद (mold) बन जाती है, जो दिमाग और फेफड़ों दोनों के लिए खतरनाक है।

  • खास लोगों को घर में ही रहने की सलाह: नवजात बच्चे, बुजुर्ग, दिल और फेफड़ों के मरीज, अस्थमा के मरीज, इनके लिए बाहरी हवा और भी ज्यादा नुकसानदेह है।

प्रदूषण बढ़ने पर शरीर को मिलने वाले संकेत

अगर आपको ये लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो समझिए हवा आपके शरीर पर असर कर रही है:

  • सिरदर्द, चक्कर

  • भूख में कमी

  • ध्यान में कमी

  • नींद की कमी

  • आंखों में जलन, गला सूखना

  • हल्की सांस फूलना

ये सभी संकेत हैं कि शरीर प्रदूषण से लड़ने की कोशिश कर रहा है।

घर में रहना सुरक्षित है, लेकिन तभी जब हवा साफ हो

डॉक्टर साफ तौर पर कहते हैं कि सिर्फ घर के अंदर रहने से सुरक्षा नहीं मिलती, जब तक कि आप घर के अंदर की हवा को साफ करने के लिए सही कदम न उठाएं। एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल, किचन प्रबंधन, वेंटिलेशन का सही समय, नमी का नियंत्रण—ये सभी कदम मिलकर घर को सुरक्षित बना सकते हैं।

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