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हिंदुत्व की विचारधारा से भारत को कितना फायदा!

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भारत में 2014 के बाद विदेश एवं देश की आंतरिक नीतियों में भारी बदलाव आया है। देश के अंदर हिन्दुत्व की विचारधारा का बोलबाला बढ़ रहा है और अल्पसंख्यकों विशेषकर मुस्लिम वर्ग को हाशिये पर धकेला जा रहा है।  धर्मनिरपेक्षता शब्द केवल संविधान तक सीमित होता जा रहा है। इसी तरह देश की विदेश नीति में भी बदलाव आया है। भारत हमेशा विश्व पटेल पर फिलिसतीन की आजादी के लिए अपनी आवाज उठाता था। लेकिन 2014 के बाद मोदी सरकार ने खुलकर इजराइल का पक्ष लिया और उसके साथ सामरिक एवं व्यापारिक रिश्ते बढ़ाए। पहले भारत केवल पाकिस्तान के विरोध में ही विश्व मंचों पर दिखाई देता था लेकिन अब भारत दुनिया में इस्लामिक आतंकवाद की बात अमेरिका और इजरायल के साथ करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अमेरिका की यात्रा की और विभिन्न सामरिक, व्यापारिक एवं तकनीकी हस्तांतरण और दोनों देशों के व्यापार को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के समझौते किए। अमेरिका, भारत- चीन सीमा विवाद का फायदा उठाकर अपने F-35 फाइटर प्लेन भारत को बेचना चाहता है। इजराइल अब कमजोर स्थिति में है और भारत की ज्यादा सहायता करने की स्थिति में नहीं है। दूसरी तरफ भारत के तुर्की से अच्छे संबंध नहीं है क्योंकि तुर्की भारत के खिलाफ और पाकिस्तान के पक्ष में दिखाई देता है। तुर्की ने दो-तीन दशकों में तकनीकी के मामले में काफी तरक्की की है। इसलिए उसका लड़ाकू ड्रोन के बेचने में विश्व के 60 प्रतिशत मार्केट पर कब्जा है। तुर्की ने पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान ‘कान’ भी बना लिया है। तुर्की विश्व में मुस्लिम देशों का खलीफा भी बनना चाहता है। तुर्की के राष्ट्रीयपति तैयब अरदुगान ने हाल ही में मलेशिया, इंडोनेशिया एवं पाकिस्तान की यात्रा की है। तुर्की के राष्ट्रपति इस्लामीकरण के नाम पर अपने देश के विकसित ड्रोन, मिसाइल, लड़ाकू विमान बेचकर मालामाल एवं ताकतवर होना चाहता है। तुर्की मुस्लिम देशों का एक ताकतवर मंच भी बनाना चाहता है, जिसमें सभी मुस्लिम देश शामिल हों।  यह मुस्लिम देशों का मंच अमेरिका और इजरायल द्वारा फैलाई जा रहे मुस्लिम देशों के खिलाफ दुष्प्रचार एवं विचारधारा का मुकाबला करेगा। विश्व स्तर पर भारत की विदेश नीति सबको साथ लेकर चलने की थी यानी गुटनिरपेक्ष की नीति, लेकिन अब भारत की नीति हिंदुत्व से प्रभावित दिखाई दे रही है। जिसके कारण मुस्लिम देशों से संबंध कमजोर पड़ सकते हैं। भारत का पड़ोसी बांग्लादेश अब मित्र देशों की गिनती से बाहर हो गया है जो भारत की विदेश नीति की असफलता ही माना जाएगा। विश्व में जैसे संकेत आ रहे हैं उससे लगता है कि अमेरिका का विश्व में सर्वशक्तिमान का पद जल्द ही छिन जाएगा। चीन दुनिया में अगला सुपर पावर देश बन सकता है। ऐसे में भारत को अपनी विदेश नीतियों की फिर से समीक्षा करनी होगी। क्योंकि इसराइल और अमेरिका की मुस्लिम विरोधी नीतियों के साथ भारत का कितना फायदा होगा यह आकलन करना होगा। विश्व में करीब 80 से ज्यादा मुस्लिम देश हैं और एक साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। मुस्लिम देशों से व्यापार कम करना या नहीं करना कितना फायदेमंद है यह सोचने की बात है। पड़ोसी पाकिस्तान को छोड़कर पहले की तरह मुस्लिम देशों के साथ व्यापार भारत के लिए जरूरी है क्योंकि बिना व्यापार के देश की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं आ सकता है। इसलिए हिंदुत्व का मुद्दा भाजपा के लिए देश की आंतरिक राजनीति में फायदेमंद हो सकता है लेकिन विश्व स्तर पर फायदेमंद नहीं हो सकता।

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