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हिंदू-मुस्लिम तनाव ‘विकसित भारत’ की राह में सबसे बड़ा रोड़ा:

जयपुर

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विकास के लिए शांति और सद्भाव जरूरी

देश की तरक्की के लिए भाईचारा है पहली शर्त

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। देश का नागरिक तब ही सुरक्षित और संपन्न हो सकता है जब देश आर्थिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक रूप से सुधारात्मक रास्ते पर चलता है। देश की सैन्य शक्ति मजबूत होनी चाहिए, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि देश में विभिन्न धार्मिक समूहों, वर्गों, जातियों एवं उपजातियों के बीच आपसी भाईचारा, शांति एवं सद्भाव हो।

समाज में जब शांति होती है, तब बच्चों और बड़ों का बौद्धिक विकास तेजी से होता है। बच्चे पढ़-लिखकर अच्छे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस, उद्योगपति एवं नेता बनते हैं। हर स्तर पर व्यक्ति सिर्फ देश के विकास की सोच रखता है और समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने की कोशिश करता है।

अच्छे समाज से ही निकलते हैं अच्छे नेता

अच्छे समाजों में अच्छे व्यक्ति पैदा होते हैं, जो देश को विकसित बनाने में अपना योगदान देते हैं। अच्छे समाज के व्यक्तियों में से ही अच्छे नेता निकलते हैं और इन्हीं में से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक बनते हैं, जो देश के विकास के लिए हर समय प्रयासरत और चिंतित रहते हैं।

वर्तमान स्थिति: धर्म और नफरत की राजनीति का बोलबाला

लेकिन अफसोस की बात है कि देश में वर्तमान में धर्म, जाति एवं नफरत की राजनीति का बोलबाला दिखाई दे रहा है।

  • धर्म और जातियों को सत्ता हासिल करने का साधन बनाया जा रहा है।

  • समाजों एवं धार्मिक समूहों के बीच नफरत पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

  • ऐसे माहौल में जो नेता पैदा हो रहे हैं, वे जनता को आपस में लड़ाने और बांटने में व्यस्त हैं।

नेताओं और उच्च अधिकारियों के लिए नागरिकों को अच्छी शिक्षा और रोजगार देने का उद्देश्य गौण हो गया है, और सिर्फ पैसा कमाना मुख्य लक्ष्य बनता जा रहा है।

न्यायपालिका और संविधान पर सवाल

लेख में चिंता जताई गई है कि देश में संविधान सिर्फ नाम का रह गया है। आरोप है कि न्यायालयों में न्याय निष्पक्षता से नहीं हो रहा है और न्यायपालिका सत्ता में बैठे उच्च स्तर के लोगों से प्रभावित दिखाई दे रही है। देश में ऐसे कानून लाए जा रहे हैं, जिनकी कोई जरूरत नहीं है।

प्राथमिकताएं: शिक्षा-स्वास्थ्य बनाम हथियार-धर्मस्थल

देश में सुरक्षा के नाम पर अरबों डॉलर युद्धक विमान, एंटी-मिसाइल एवं पनडुब्बियाँ खरीदने पर खर्च किए जा रहे हैं। कॉलेज, अस्पताल और यूनिवर्सिटी बनाने से ज्यादा खर्च धार्मिक स्थलों पर किया जा रहा है।

लेकिन विडंबना यह है कि सत्ता में बैठे नेताओं को शिक्षा, रिसर्च एवं विकास का बजट बढ़ाने में मुश्किल दिखाई देती है।

  • सरकारी स्कूलों की इमारतें टूटी-फूटी और जर्जर हैं।

  • अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है।

  • शिक्षा और कार्य स्थलों पर धार्मिक नफरत के उदाहरण दिखने लगे हैं।

कैसे बनेगा विकसित भारत?

‘विकसित भारत’ का नारा जोर-शोर से दिया जा रहा है, लेकिन यह कोई बताने के लिए तैयार नहीं है कि भारत विकसित बनेगा कैसे? देश में बढ़ती बेरोजगारी और नकारात्मकता का वातावरण देश की बर्बादी का संकेत है।

हिंदू-मुस्लिम तनाव के कारण देश की छवि धूमिल होती है, जिससे विदेशी निवेश (Foreign Investment) आने में परेशानी होती है। इससे देश आर्थिक रूप से कमजोर होता है और रोजगार के साधन कम होते हैं।

निष्कर्ष: जब तक देश में सांप्रदायिक तनाव रहेगा, तब तक ‘विकसित भारत’ का सपना पूरा होना मुश्किल है। यह तनाव विकास में सबसे बड़ा बाधक है।

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