Loading...

वो हमारे आका हैं

Paali

default-image

Follow us

Share

जो चाँद को उँगलियों पे घुमाए वो हमारे आका हैं

डूबे सूरज को जो वापस पलटाए वो हमारे आका हैं

पत्थरों को जो कलमा पढ़वाये वो हमारे आका हैं

रोते हुए यतीमों को जो हँसाये वो हमारे आका हैं

जुल्म-ओ-जब्र का निजाम ही बदल के रख दिया

दरगौर होती बच्चियों को बचाये वो हमारे आका हैं

फरिश्तों के सरदार भी जिनके कदमों पे आंखे मले

शबे मेराज जिन्हें खुद खुदा बुलाये वो हमारे आका हैं

जानवर भी जिनसे आकर अपने दुःख का जिक्र करे

शजर खुद जिनके पास चल के आये वो हमारे आका हैं

जब कोई किसी का भी नहीं होगा उस महशर के दिन

उस दिन भी जो हमको गले लगाए वो हमारे आका हैं

जब तक जिन्दा हैं जश्ने विलादत मनाते रहेंगे हम यूसुफ

हम आसियों के जो गुनाह बख्शवाऐ वो हमारे आका हैं

दुआओं का तलबगार : मो. यूसुफ अशरफी

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।