चर्चा का विषय बना प्रधानमंत्री मोदी की ओर से गरीब नवाज दरगाह अजमेर पर चादर पैश करना
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से 4 जनवरी 2025 को ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह, अजमेर पर चादर पेश की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से केंद्रीय मंत्री किरण रिजीजू से दिल्ली से चादर लाए और अजमेर आकर चादर दरगाह पर पेश की। चादरपोशी के समय राजस्थान भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा राजस्थान के सैकड़ो कार्यकर्ता मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चादर वैसे तो हर वर्ष उर्स के समय पेश की जाती है, लेकिन इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दरगाह पर चादर चढ़ाया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि आरएसएस का अनुषांगी संगठन विश्व हिंदू परिषद के एक पदाधिकारी ने ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के अंदर पहले शिव मंदिर होने का दावा किया और मामले को अदालत तक ले गया। ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में शिव मंदिर बताने और मामले को अदालत तक ले जाने के कारण ख्वाजा गरीब नवाज के अकीदतमंदों और देश के मुसलमानों को काफी पीड़ा हुई। क्योंकि ख्वाजा गरीब नवाज के मानने वालों की संख्या करोड़ों की तादाद में है, इसलिए इस मामले को तूल देना आग से खेलने के बराबर है। मस्जिदों, दरगाहों में शिव मंदिर ढूंढने की आदतों पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने उन हिंदुओं की आलोचना की थी जो शिव मंदिर मस्जिदों और दरगाहों में खोज कर सस्ती लोकप्रियता चाह रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे लोगों की कभी आलोचना नहीं की और ना ही ऐसे लोगों को गलत बताया। देश के मुसलमान कंफ्यूज हैं कि प्रधानमंत्री मोदी गरीब नवाज में विश्वास करते हैं या फिर शिव मंदिर ढूंढने वालों को मूक समर्थन दे रहे हैं। अब जबकि प्रधानमंत्री मोदी की ओर से ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर चादर पेश की गई है। तो क्या यह समझा जाए कि प्रधानमंत्री मोदी दरगाह में शिव मंदिर खोजने वालों के साथ नहीं हैं। जबकि विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी जिसने दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा किया था, ने मोदी से ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह पर चादर पेश नहीं करने के अपील की थी। लेकिन फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चादर पेश की गई। इससे देश में संदेश जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऐसे लोगों का, जो देश में मंदिर मस्जिद के नाम पर अराजकता फैलाना चाहते हैं, का समर्थन नहीं करते हैं। यदि प्रधानमंत्री दरगाह और मस्जिदों में शिव मंदिर खोजने के प्रयास पर आरएसएस प्रमुख भागवत की तरह वक्तव्य देकर स्पष्ट करते तो देश में आपसी भाईचारे और सोहार्द का अच्छा संदेश जाता। वैसे भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बनाना चाहते हैं। जो बिना हिंदू मुस्लिम की एकता के नहीं बन सकता है। इसलिए देश में छोटे-छोटे मुद्दों पर हिंदू मुस्लिम के विवादों को कम करने के लिए प्रधानमंत्री का वक्तव्य देना बहुत जरूरी है। क्योंकि देश के प्रधानमंत्री का किसी विषय पर अपना मत प्रकट करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। वैसे भी देश की तरक्की के लिए देश में धार्मिक मुद्दों के विवादों को कम करना या समाप्त करना बहुत जरूरी है।
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