वक्फ एमेंडमेंट बिल का बढ़ता विरोध, नीतीश और नायडू को खतरा
- बिहार विधानसभा चुनाव में बदल सकता है जीत का गणित
जयपुर,(रॉयल पत्रिका)। वक्फ संशोधन बिल का विरोध मुसलमानों के द्वारा पूरे देश में किया जा रहा है। वैसे मुसलमानों का मोदी सरकार का विरोध बीजेपी पार्टी के लिए राजनीति में फायदेमंद होता है, लेकिन भाजपा के सहयोगी दलों जैसे जेडीयू और टीडीपी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को मुख्यमंत्री बनाने में मुसलमानों का बड़ा योगदान रहा है। वक्फ एमेंडमेंट बिल यदि लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा पेश किया जाता है तो जेडीयू और टीडीपी के बिना सहयोग के पास नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में बिहार विधानसभा चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। संसद में वक्फ संशोधित बिल पास होने पर मुसलमान नीतीश कुमार से नाराज हो सकते हैं। बिहार के मुस्लिम संगठनों ने नीतीश कुमार की रोज़ा इफ्तार पार्टी का भी विरोध किया था। बिहार में दूसरे प्रभावी दलित नेता चिराग पासवान से भी नाराज बताए जा रहे हैं।
- बिहार की राजनीति और संशोधित वक्फ संशोधित बिल –
वैसे जब से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बने थे और मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने थे तभी से देश के मुसलमानों और सेक्युलर दलों की गलतफहमी निकल गई है कि बिना मुसलमानों के राज्यों और केंद्र में सरकार नहीं बन सकती है। इसलिए वर्तमान राजनीति में सरकार बनाना और नहीं बनाना मुसलमान के हाथ में नहीं रहा है। फिर भी बिहार में करीब 18 से 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं जो किसी भी दल की हार-जीत में प्रभावित हो सकते हैं। बिहार में दलित और पिछड़ा वर्ग के वोटरों की संख्या उच्च वर्ग के वोटरों से बहुत ज्यादा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी धर्म एवं हिंदू मुस्लिम की राजनीति नहीं करते हैं। इसलिए पिछले विधानसभा चुनाव में मुसलमानों ने उनका भरपूर सहयोग किया था, जबकि नीतीश का भाजपा के साथ गठबंधन था। लेकिन वक्फ संशोधित बिल के कारण मुसलमान नीतीश कुमार से नाराज हो सकते हैं। मुसलमानों की नाराजगी का फायदा लालू प्रसाद की पार्टी राजद को मिल सकता है। बिहार में करीब 100 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम वोटर प्रभावी है। पिछले विधानसभा चुनाव में थोड़े से अंतर से तेजस्वी यादव सरकार नहीं बना पाए थे। लेकिन भाजपा, नीतीश और चिराग पासवान का गठबंधन भी मजबूत स्थिति में है और फिर से मुसलमानों के नाराज होने के बावजूद सरकार बना सकता है। बिहार में 2025 के अंत में चुनाव होने जा रहे हैं।
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