अजमेर रोड पर गैस हादसे से सरकारी सिस्टम की पोल खुली
जयपुर- अजमेर हाइवे पर शुक्रवार सुबह गैस टैंकर की टक्कर से हुए अग्निकांड के बाद राजधानी जयपुर के चिकित्सा, पुलिस व्यवस्था और केन्द्रीय हाइवे ऑथोरिटी की पोल खुल गई। मेडीकल हब बनने का दावा कर रहे चारों दिशाओं में 40 किलोमीटर तक फैल चुके इस शहर में सवाई मानसिंह अस्पताल के अलावा दूसरे किसी भी अस्पताल में बर्न केस का इलाज करने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। हादसे के बाद सवाई मानसिंह अस्पताल में एक साथ इतने झुलसे लोग आए कि वहां के हालात खराब हो गए। कुछ मरीज अपने स्तर पर निजी अस्पतालों में पहुंचे। इनमें से कुछ को बमुश्किल भर्ती किया गया। तो कुछ को चक्कर लगाकर एसएमएस हॉस्पीटल में वापस आना पड़ा। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को राजस्थान इंस्टीटयूट ऑफ मेडीकल साइसेंज (रिम्स) बनाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन 1200 बैड की क्षमता वाले इस अस्पताल में एक भी बर्न केस को शिफ्ट नहीं किया जा सका। यही हाल कांवटिया, बनीपार्क, गणगौरी अस्पताल का है। हादसे में अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी हैं। इनमें से एक झुलसे हुए व्यक्ति को जयपुरिया अस्पताल ले जाया गया था। 27 मरीजों का अब भी एसएमएस में ही इलाज चल रहा है। प्रदेश में प्लास्टिक सर्जन की संख्या भी बेहद कम है। सरकारी ही नही निजी अस्पतालों में बर्न यूनिट मुश्किल से ही मिलती है। दूसरी तरफ हादसे के बाद लगे जाम के कारण कुछ झुलसे लोगों को एसएमएस तक पहुंचने में दो घंटे तक लग गए। यदि घायलों को जल्दी समय पर इलाज मिल जाता तो कुछ घायलों की जान बचाई जा सकती थी। हादसे के बाद ट्रैफिक पुलिस और कमिश्नरेट पुलिस ट्रैफिक व्यवस्था घटना स्थल एवं अस्पताल की व्यवस्था ठीक तरह से संभालने में नाकाम रही। यही कारण है कि घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल पाया। प्रदेश सरकार अच्छे इलाज और सुरक्षा का आए दिन दावा करती रहती है। लेकिन सरकार के दावों की इस गैस अग्निकांड ने पोल खोलकर रख दी। इसी तरह केन्द्र सरकार का हाईवे ऑथोरिटी विभाग दावा करता है कि देश में अच्छे हाइवे बना दिए हैं। हाइवे ऑथोरिटी के अधिकारियों की लापरवाही के कारण दर्जनों लोगों की इस हादसे में जान चली गई। अजमेर रोड़ पर पर्याप्त रोड़ कट और पुलिया नहीं है। कुछ पुलियाओं का काम लम्बे समय से निर्माण चल रहा है लेकिन काम पूरा होने का नाम ही नहीं ले रहा है। अजमेर-जयपुर हाइवे पर जाने वाले वाहन चालकों और यात्रियों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है। फिर भी अधिकारी अपने मिजाज के अनुसार काम करते हैं। सरकार में बैठे मंत्री और अधिकारी प्रदेश और राज्य में सब कुछ ठीक चलने का दावा तो करते रहते हैं, लेकिन जब कोई हादसा घट जाता है तो इन दावों की पोल खुलने में देर नहीं लगती है। व्यवस्थाओं को सुधारने की हादसे के बाद याद आती है। लेकिन कुछ दिन बाद फिर घटनाओं और जिम्मेदारियों को भुला दिया जाएगा।
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