अंता विधानसभा उपचुनाव में सरकार, विपक्ष की प्रतिष्ठा दाव पर



संभावित तीसरे मोर्चे के नेताओं ने पूरी ताकत झोंकी
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एवं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया रोड शो
- जीत के लिए सभी उम्मीदवारों का अपना अपना दावा
एम खान जयपुर (रॉयल पत्रिका)। अंता विधानसभा उपचुनाव बड़ी रोचक स्थिति में पहुंच गया है। सरकार और विपक्ष के नेताओं ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है।
भाजपा की गंभीरता
प्रदेश में भाजपा की सरकार है। झालावाड़ संसदीय क्षेत्र का अंता विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई। माना जा रहा है कि भाजपा उम्मीदवार मोरपाल सिंह सुमन को पूर्व मुख्यमंत्री राजे की अनुशंसा पर ही टिकट दिया गया है।
भाजपा की गंभीरता का पता इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने लगातार दो दिन 8 और 9 नवंबर को चुनाव प्रचार किया। भाजपा ने अंता विधानसभा चुनाव जीतने के लिए सभी संभावित प्रयास किए हैं।
कांग्रेस का सघन प्रचार
इसी तरह कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन 9 नवंबर को अंता में रोड शो किया और कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को जिताने की जनता से अपील की।
कांग्रेस के धुरंधर नेता प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, सचिन पायलट, धर्मेंद्र सिंह राठौड़, प्रहलाद गुंजल, अशोक चांदना, शांति धारीवाल सहित दर्जन नेताओं ने सघन प्रचार किया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है।
नरेश मीणा को मिल रहे समर्थन से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही भयभीत
अंता विधानसभा चुनाव संभावित तीसरे मोर्चे के नेताओं ने निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
सांसद हनुमान बेनीवाल, पूर्व मंत्री राजेंद्र गुड़ा, सांसद संजय सिंह, एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष अशफाक खान और आम आदमी के प्रदेश अध्यक्ष ने अंता चुनाव में नरेश मीणा को जिताने के लिए पूरी कोशिश की है। नरेश मीणा यदि चुनाव जीतते हैं तो राजस्थान में संभावित तीसरे मोर्चे का जन्म होना तय माना जा रहा है।
अंता में कांटे की टक्कर
अंता की जनता ने भी सभी उम्मीदवारों और पार्टियों को बराबर-बराबर समर्थन देकर ऐसा माहौल बना दिया है कि यहां कांग्रेस, बीजेपी और नरेश मीणा में से किसी की भी जीत हो सकती है।
अंता की जनता नेताओं से ज्यादा होशियार दिखाई दे रही है और चुनाव प्रचार का पूरा आनंद उठा रही है। जबकि पार्टियों के नेता और कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, पैसा खर्च कर रहे हैं, फिर भी जीत की गारंटी नहीं है। अंता की जनता ने नेताओं से बहुत मेहनत करवाई है, लगता है पूरे 5 वर्ष नेताओं के चक्कर लगाने वाली जनता ने नेताओं से उनसे ज्यादा मेहनत और चक्कर लगवा लिए हैं।
11 नवंबर को चुनाव होना है और 14 नवंबर को परिणाम आएगा लेकिन इस चुनाव में पहली बार जनता की जीत होने जा रही है।
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संभावित तीसरे मोर्चे के नेताओं ने पूरी ताकत झोंकी