राजकीय अल्पसंख्यक बालिका छात्रावास सफाई को तरसा, खिड़कियां टूटी हुई
जासिर पठान
मानसरोवर, जयपुर(रॉयल पत्रिका)। मानसरोवर स्थित अल्पसंख्यक बालिका छात्रावास के हाल बेहाल। कई वर्षों से यह बालिका छात्रावास चल रहा है लेकिन मूलभूत सुविधाओं का यहाँ अभाव है। क़रीब 100 लड़कियां हर साल इस छात्रावास में रहती हैं लेकिन ना कोई ख़ास सफ़ाई व्यवस्था ना फ़िल्टर पानी।पूरे हॉस्टल में ना तो पानी फ़िल्टर ठीक से काम करता ना कोई ठंडे पानी की मशीन। फ़िल्टर पानी के लिए हॉस्टल की लड़कियों को भटकना पड़ रहा है। आसपास दूसरी बिल्डिंगों से लाती हैं पीने का फ़िल्टर पानी। वार्डन ने कई शिकायतों के बाद मटके रखवा दिए। अल्पसंख्यक छात्रावास की ये इमारत काफ़ी पुरानी हो चुकी है,जो अब मरम्मत माँग रही, खिड़कियां हैं टूटी हुई, हाथ धोने के लिए 100 छात्राओं के लिए एक वॉशबेसिन, गंदे बाथरूम और शोचालय, हर जगह सीलन आयी हुई। बारिश में हालात और ख़राब हो जाते हैं , सीलन की वजह से आये दिन पंखे लाइट खराब होते रहते हैं जिनको छात्राएं स्वयं अपने खर्चे से ठीक करवाती हैं , इसमें हॉस्टल प्रशासन का साफ़ इनकार रहता है। खाने की अगर बात करें तो यहाँ छात्राएँ हॉस्टल मै से ही खाना खाती हैं लेकिन हालत यह है कि कई मर्तबा खाने से लड़कियों को फूड पॉइज़निंग की शिकायत भी हुई है जिससे कई छात्राएँ कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहकर आयीं हैं। मजबूरन छात्राओं को वही भोजन खाना पड़ रहा।छात्राओं द्वारा कई बार शिकायतें की गईं लेकिन कोई ख़ास सुधार प्रशासन द्वारा नहीं हो सका। हॉस्टल वार्डन द्वारा शिकायतकर्ता छात्राओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की भी कई शिकायतें आई , वार्डन द्वारा धमकाया भी गया कि अगले साल एडमिशन नहीं मिलेगा। सूत्रो की माने तो वार्डन शबनम की अनुमति से करीब 2-3 लड़कियाँ अवैध बिना एडमिशन के भी हॉस्टल में रह रहीं हैं। वार्डन शबनम से जब भी छत्राओं द्वारा शिकायत की गई , भोजन और पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल किया उनका यही जवाब रहा के इतना ही मिलता है सरकार से इसी में गुज़ारा करो।जबकि सरकार की तरफ़ से हर सुविधा का सामान छात्राओं की संख्या के अनुसार पूरा आता है। सवाल यह है फिर भोजन की स्थिति इतनी ख़राब क्यों ? क्या कोई बड़ा घपला बीच में हो रहा है? अल्पसंख्यक विभाग जयपुर DMO जिनका ऑफिस इसी हॉस्टल के पीछे बना हुआ है जब DMO से इन सवालों को पूछा गया तो उनका कहना है कि मेरे पास कोई शिकायत छात्राओं की तरफ़ से नहीं आई।हम हर महीने इंस्पेक्शन भी करते हैं , छात्राओं से फीडबैक भी लेते हैं और वार्डन से भी पूछते रहते हैं हॉस्टल के बारे में। लेकिन क्या DMO साहब को अपने द्वारा संचालित हॉस्टल की इन तमाम असुविधाओं का पता नहीं ? या वह भी वार्डन की तरह अनजान बने हुए हैं ?
हालाकि DMO ने बताया के पानी की फ़िल्टर मशीन चल रही है लेकिन ठंडे पानी का कूलर नहीं हैं , इमारत की मरम्मत के लिए उन्होंने कोटेशन भी बना दिया और कई बार आगे पत्र भी लिखा लेकिन सरकार की तरफ़ से कोई ख़ास समाधान नहीं हो पाया। अब सवाल यह उठता है कि अल्पसंख्यक छात्रावास पर सरकार की इतनी बे-धियानी आखिर क्यों ? राजधानी में अल्पसंख्यक छात्राओं के लिए एक मात्र हॉस्टल जहाँ पूरे प्रदेश के अलग अलग ज़िलो से छात्राएँ आतीं हैं फिर उन्हें खाने, पानी और सफ़ाई जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं। इससे सरकार का रूख साफ़ नज़र अता है अल्पसंख्यक समाज के छात्रों को लेंकर।
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