पूर्व वक्फ बोर्ड सदस्य मोहम्मद युसुफ ने जमकर पद का दुरूपयोग किया
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। वक्फ बोर्ड राजस्थान के पूर्व सदस्य एवं मुतवल्ली दरगाह सरवाड शरीफ मोहम्मद युसुफ ने अपने पद पर रहते हुए जमकर दुरूपयोग किया था। वैसे तो पूर्व सदस्य के कई मामले हैं, लेकिन एक मामला ऐसा है कि जिसमें उन्होंने अपने एक रिश्तेदार को अजमेर की घंटाघर मस्जिद में एक वक्फ प्रोपर्टी मात्र 880/- माह के किराये पर दिलवाई थी। जिसका किराया आज दिनांक तक नहीं बढ़ाया गया है। जबकि वक्फ एक्ट 1995 की धारा 64 के तहत वक्फ बोर्ड के सदस्य के किसी रिश्तेदार के नाम किरायेदारी गैर कानूनी है। अजमेर शहर में करीब 207 वक्फ प्रोपर्टियों का किराया 1 अप्रेल 2024 से बढ़ाया गया, लेकिन मोहम्मद युसुफ के प्रभाव के चलते वक्फ बोर्ड की ओर से उनके रिश्तेदार किरायेदार मुजीबुद्दीन द्वारा संचालित केजीएन होटल का किराया नहीं बढ़ाया गया। केजीएन होटल जो घंटाघर मस्जिद अजमेर की वक्फ प्रोपर्टी है का वर्तमान में कम से कम 50 हजार रूपये किराया (PWD Rate) होना चाहिए। लेकिन मोहम्म्द युसुफ के प्रभाव के चलते वक्फ बोर्ड किराया नहीं बढ़ा रहा है। वक्फ नियमों के अनुसार किराया नही बढ़ाने के साथ साथ इस प्रोपर्टी की किरायेदारी भी गैर कानूनी है। अब देखना है कि वक्फ बोर्ड केजीएन होटल का किराया उसी तरह बढ़ाता है कि नहीं, जिस तरह अजमेर शहर की दूसरी सैंकडों प्रोपर्टियों का किराया बढ़ाया था। प्रथम दृष्टि में वक्फ बोर्ड के पूर्व सदस्य का पद पर रहते हुए पद के दुरूपयोग का मामला है जिस पर वक्फ बोर्ड एवं राज्य सरकार को संज्ञान लेने की जरूरत है। आश्चर्य की बात है कि अजमेर घंटाघर मस्जिद प्रोपर्टी का पूर्व बोर्ड सदस्य का रिश्तेदार अजमेर निवासी भी नही है। किरायेदार जन्म से ही जयपुर निवासी है।
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