अजमेर शरीफ में पहली बार हिंदू, मुस्लिम, सिख गुर्जर समुदाय की ओर से मिलकर पेश हुई खास चादर
गुर्जर समाज की ऐतिहासिक पहल — विजय बैंसला ने पेश की चादर, कर्नल बैंसला को किया याद
अजमेर (रॉयल पत्रिका)। अजमेर शरीफ दरगाह पर गुर्जर समाज की ओर से एक ऐतिहासिक और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करने वाली चादर चढ़ाई गई। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने बताया कि यह चादर केवल भारत ही नहीं, बल्कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान और दुनियाभर में बसे गुर्जर समुदाय की ओर से संयुक्त रूप से चढ़ाई गई है।
सर्वधर्म समभाव का प्रतीक
इस चादर की खासियत यह रही कि यह हिंदुस्तान में बसे मुस्लिम गुर्जरों, सिख गुर्जरों, गद्दी मुसलमानों और जम्मू-कश्मीर के गुर्जर बकरवाल समुदाय की ओर से सामूहिक रूप से पेश की गई।
भाजपा नेता विजय बैंसला ने निभाई रस्म
इस मौके पर भाजपा नेता और संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला गुरुवार (25 दिसंबर) को अजमेर शरीफ़ दरगाह पहुंचे। यहां उन्होंने चादर पेश की और ज़ायरीनों को भोजन करवाया।
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पीएम मोदी का संदेश: उन्होंने कहा कि इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेजी गई चादर और “सबका साथ- सबका विकास” संदेश के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।
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सोशल मीडिया: इस बारे में उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर जानकारी भी दी।
कर्नल बैंसला के नक्शेकदम पर
विजय बैंसला ने अपने पिता को याद करते हुए कहा, “बीते कल गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की टीम के साथ अजमेर शरीफ़ दरगाह पहुंच कर दरगाह पर चादर पेश की और ज़ायरीनों को भोजन करवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मेरे पिता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला भी अजमेर शरीफ आया करते थे। मुझे खुशी है कि मुझे भी उनके नक्शे कदम पर चलकर ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के मार्ग पर अग्रसर रहने का सौभाग्य मिल रहा है।”
खादिम सैयद बिलाल चिश्ती की घोषणा: हर साल पेश होगी चादर
बैंसला के मुताबिक, दरगाह के प्रमुख खादिम सैयद बिलाल चिश्ती ने पूरे गुर्जर समुदाय को आश्वासन दिया कि उनकी नेक और जायज़ माँगों के लिए समस्त गुर्जर समाज को पूरा सहयोग दिया जाएगा।
महत्वपूर्ण घोषणाएं:
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पुण्यतिथि पर सम्मान: दरग़ाह के ख़ादिम समुदाय हर साल कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की पुण्यतिथि के दिन गुर्जर समाज के साथ शामिल होकर दरगाह में ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करेंगे।
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सालाना परंपरा: अब से हर साल सद्भावना, सौहार्द, अच्छी शिक्षा और अच्छे स्वास्थ्य के संदेशों के साथ उर्स के पर्व पर ‘समाज की चादर’ पेश की जाएगी।
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