हजरत अबूजर रज़ी. अ. की मशहूर हदीस
एक मशहूर हदीस जिसको हजरत अबूजर गफारी रज़ी. अ. ने रिवायत किया है। आप (अबूजर रज़ी. अ.) फरमाते हैं कि मैं मस्जिद में आया उस वक्त हजरत हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ फरमा थे। मैं भी आपके पास बैठ गया और मैंने कहा आप स. अ. ने नमाज का हुक्म दिया है? आप स. अ. ने फरमाया हां वो बेहतर चीज है। मैंने कहा हुजूर स. अ. कौन सा आमाल अफजल है? फरमाया अल्लाह पर ईमान लाना, उसकी राह में जिहाद करना, मैंने कहा हुजूर स. अ. कौन-सा मोमिन अफजल है? फरमाया सबसे अच्छे अखलाक वाला। मैंने कहा हुजूर स. अ. कौन-सा मुसलमान आला है ? फरमाया जिसकी जबान और हाथ से मुसलमान सलामत रहें । मैंने पूछा कौन-सी हिजरत अफजल है ? फरमाया बुराइयों को छोड़ देना। मैंने पूछा कौन-सी नमाज अफजल है? फरमाया लंबे कुनूत (इबादत) वाली। मैंने पूछा कौन-सा रोजा अफजल है? फरमाया फर्ज किफायत करने वाला है और अल्लाह तआला के पास बहुत बढ़ा-चढ़ा सवाब है। मैंने पूछा कौन-सा जिहाद अफजल है? फरमाया जिसका घोड़ा भी काट दिया जाए और खुद उसका खून बहा दिया जाए, मैंने कहा कौन-सा गुलाम आजाद करना अफजल है? फरमाया जिस कदर गरां (महंगी) कीमत हो और मालिक को ज्यादा पसंद हो, मैंने पूछा सदका कौन-सा अफजल है? फरमाया कम माल वाले का कोशिश करना और चुपके से मोहताज को दे देना। मैंने कहा कुरान में सबसे बड़ी आयत कौन-सी है? फरमाया आयतुल कुर्सी, फिर आप स. अ. ने फरमाया ए ! अबूजर सातों आसमान कुर्सी के मुकाबले में ऐसे हैं जैसे कोई हलका किसी चटियल मैदान के मुकाबले में और अर्श की फजीलत कुर्सी पर भी ऐसी है जैसे वसीअ (चौड़े) मैदान के हलके पर (गोल इलाका)।
हजरत अबूजर गफारी ने फिर कहा हुजूर स. अ. अंबिया कितने हैं ? फरमाया एक लाख चौबीस हज़ार, मैंने कहा उन में से रसूल कितने हैं ? फरमाया तिन सौ तेरह बहुत बड़ी पाक जमाअत, मैंने पूछा सबसे पहले कौन हैं ? फरमाया हजरत आदम अ.स., मैंने कहा वो भी नबी रसूल थे? फरमाया हां उन्हें अल्लाह तआला ने अपने हाथ से पैदा किया और अपनी रूह उनमें फूंकी और उन्हें सहीतर बनाया I फिर आपने फ़रमाया सुनो चार नबी तो सुरयानी हैं, आदम अ.स.शीस अ.स., खुन्नू अ.स. और यही इदरीस अ.स. हैं, जिसने सबसे पहले कलम से लिखा और नूह अ.स. और चार अरबी हैं, हूद अ.स., शुएब अ.स., सालेह अ.स. और तुम्हारे नबी स.अ.। सबसे पहले रसूल हजरत आदम अ. स. हैं और सबसे आखरी रसूल मोहम्मद स. अ. हैं । मैंने पूछा या रसूल अल्लाह अल्लाह तआला ने किताबें कितनी नाजिल फरमाई हैं I फरमाया एक सौ चार, हज़रत शीस अ. स. पर पचास सहीफ़े, हजरत खून्नू अ. स. (इदरीस) पर तीस सहीफ़े, हजरत इब्राहिम अ.स. पर दस सहीफ़े, और मूसा अ. स. पर तोरेत से पहले दस सहीफ़े और तोरात, इंजील (हजरत ईसा अ. स. पर), जुबूर (हजरत दाऊद अ. स.) पर और फुरकान (कुरान मजीद) I
मैंने कहा या रसूल अल्लाह स. अ. हजरत इब्राहिम अ. स. के सहिफों में क्या था? फरमाया उसका कुल ये था I ए ! बादशाह मुसल्लत किया हुआ मगरूर मैंने तुझे दुनिया जमा करने वाला और मिला-मिला कर रखने के लिए नहीं भेजा I बल्कि इसलिए कि तू मजलूम की पुकार को मेरे सामने से हटा दे, अगर मेरे पास पहुंचे तो मैं उसे रद्द न करूंगा गोया वोह मजलूम काफिर ही हो। उनमें मिसालें भी थीं यह कि आकिल को चाहिए कि वोह औकात के कई हिस्से करे, एक वक्त अपने नफ्स का हिसाब ले, एक वक्त खुदा तआला की सिफत पर गौर करे, एक वक्त अपने खाने-पीने की फिक्र करे, आकिल को चाहिए कि तीन चीजों के सिवा किसी में अपने आप को मुनहमिक (यानी मसरूफ) ना करे, या तो तोशा आखिरत (नेक आमाल) या हुसूले मआश, या गैर हराम चीजों से सुरूर लज्जत। आकिल को चाहिए कि अपना वक्त देखता रहे, अपने काम में लगा रहे अपनी जुबान की निगाह दाश्त करे I जो शख्स अपने कोल को अपने फेल से मिलाता रहेगा वोह बहुत कम गो (कम बोलने वाला) होगा। कलाम वो ही करो जो तुम्हें नफा दे। मैंने पूछा मूसा अ. स. के सहीफों में क्या था? फरमाया सरासर इबरतें, मुझे ताअज्जुब है उस शख्स पर जो मौत का यकीन रखता है फिर मस्त है, तकदीर का यकीन रखता है फिर हाय-हाय में पड़ा हुआ है। दुनिया की बेसबाती देखाता है फिर उस पर इत्मीनान किए हुए है। कयामत के हिसाब के दिन को जानता है फिर भी बेअमल है। मैंने फिर हुजूर स. अ. अगले अंबिया की किताबों में जो था उसमें से कुछ हमारी किताब (कुरान हकीम) जो हमारे हाथों में है। आपने स. अ. पढ़ो कुरान की सत्यास्वीं सूरत “सूरत आला” आयत नंबर 14 से आखिरी आयत 19 तक जिनमें हजरत मूसा के सहीफों का जिक्र है। जिनका तर्जुमा निम्न अनुसार है।
बेशक उन लोगों ने फलाह पाली जो पाक हो गए और जिन्होंने अपने रब का नाम याद रखा और नमाज पढ़ते रहे, लेकिन तुम दुनिया का जीना सामने रखते हो, और आखिरत बहुत बेहतर और बहुत बका वाली है, यह बातें पहली किताबों में भी हैं, यानि इब्राहिम अ. स. और मूसा अ. स. की किताबों में है तफसीर आयत सफा 22 व् 23 सूरत निसा तफ़रीर इब्ने कसीर मूसनद अहमद की हदीस है कि रसूलुल्लाह स. अ. फरमाते हैं कि जिसने दुनिया से मोहब्बत की उसने अपनी आखिरत को नुकसान पहुंचाया और जिसने आखिरत से मोहब्बत रखी उसने दुनिया को नुकसान पहुंचाया, तुम ए लोगों ! बाकी रहने वाली को फना होने वाली पर तरजीह दो I
आखिर में इब्ने करीम से दुआ है कि वोह हमको अपनी जिंदगी में इस हदीस पर ज्यादा से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन !
-हबीबुल्ला एडवोकेट,
जवाहर नगर, जयपुर
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