फ़ख़रुद्दीन अली अहमद: भारत के पाँचवें राष्ट्रपति का संक्षिप्त जीवन परिचय
फ़ख़रुद्दीन अली अहमद का जन्म 13 मई 1905 को दिल्ली में हुआ था। वो एक मशहूर भारतीय सियासतदान थे और साल 1974 से 1977 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। उनके वालिद असम में फ़ौज के डॉक्टर थे। अहमद साहब ने अपनी तालीम भारत में हासिल की और फिर इंग्लैंड की मशहूर यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैंब्रिज से तारीख़ (इतिहास) में तालीम हासिल की, जहाँ से उन्होंने 1927 में ग्रेजुएशन पूरा किया। भारत वापसी के बाद उन्होंने सियासत में कदम रखा और 1935 में असम विधानसभा के लिए चुने गए। 1938 में जब वो असम के वित्त और राजस्व मंत्री बने, तो उन्होंने टैक्स से जुड़ी कुछ बुनियादी और साहसी इस्लाहात कीं। 1939 में जब दूसरी आलमी जंग (World War II) शुरू हुई, तो कांग्रेस पार्टी ने अंग्रेज़ हुकूमत के खिलाफ मोर्चा खोला। इसके नतीजे में फ़ख़रुद्दीन अली अहमद को एक साल के लिए जेल भेजा गया। रिहाई के कुछ ही दिनों बाद उन्हें दोबारा गिरफ़्तार किया गया और इस बार वो साढ़े तीन साल तक जेल में रहे। अप्रैल 1945 में उन्हें रिहा किया गया। 1946 में उन्हें असम का एडवोकेट जनरल (राज्य का मुख्य कानूनी सलाहकार) बनाया गया और उन्होंने ये ओहदा छह साल तक संभाला। इसके बाद उन्होंने कुछ वक्त तक भारतीय संसद में काम किया और फिर असम की सियासत में लौट आए। जनवरी 1966 में जब इंदिरा गांधी ने अपना पहला कैबिनेट बनाया, तो उन्होंने फ़ख़रुद्दीन अली अहमद को उसमें शामिल किया। उन्होंने सिंचाई और बिजली, शिक्षा, औद्योगिक विकास और कृषि जैसे अहम मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी संभाली। 1974 में वो भारत के पाँचवें राष्ट्रपति बने। 11 फरवरी 1977 को दिल का दौरा पड़ने से उनका इंतक़ाल हो गया।
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