तालीमी कांफ्रेंस में दिया गया शिक्षा की बेहतरी पर जोर
जयपुर। राजधानी जयपुर के शास्त्री नगर स्थित साइंस पार्क ऑडिटोरियम में शनिवार को मदरसा जामिया तय्यबा मेमोरियल स्कूल, नाहरी का नाका, जयपुर के बैनर तले तालीमी कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। तालीमी कांफ्रेंस में कई आरएएस व् आईएएस अधिकारी, शिक्षाविद एवं विद्वान लोग शामिल हुए। कांफ्रेंस में मुस्लिम समाज के उत्थान व शिक्षा की बेहतरी पर बारीकी से मंथन किया गया। इस बैठक में शहर सहित आस पास के प्रबुद्ध लोगों ने शिरकत की। कांफ्रेंस की अध्यक्षता शहर के प्रमुख शिक्षाविद सय्यद अनवर शाह एवं रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अशफाक हुसैन ने की व् विशिष्ट अतिथि जयपुर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अभिषेक सिद्ध रहे। कॉन्फ्रेंस में हाल ही में नवचयनित आरजेएस अधिकारी सना चौहान का सम्मान किया गया। कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अशफाक हुसैन ने मुस्लिम समाज के बच्चे बच्चियों को उच्च शिक्षा हासिल करने एवं इनके अभिभावकों के साथ समाज के लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक रहने की बात कही। कॉन्फ्रेंस में सभी अतिथियों ने शिक्षा की महत्वपूर्णता पर जोर डाला। मुस्लिम समाज के बच्चे बच्चियों के ड्रॉपआउट पर चिंता व्यक्त की। इस मौके पर कॉन्फ्रेंस में मदरसा जामिया के होनहार छात्र-छात्राओं का भी सम्मान किया गया। मदरसा जामिया तय्यबा के संचालक कारी मोहम्मद इस्हाक ने कॉन्फ्रेंस में आगंतुक अतिथियों के साथ छात्र/छात्राओं व इनके अभिभावकों की गरिमामय उपस्थिति का आभार जताया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का स्कूल कमेटी की ओर से गुलपोशी द्वारा सम्मान किया गया वहीँ मंच संचालन शाहनवाज़ लाला ने किया। इस अवसर पर जनमानस न्यूज़ के एडिटर डॉ अब्दुल रहीम ने भी समाज की बेहतरी के लिए तालीम को बढ़ावा देने इत्यादि बारीकियों पर विचार रखें।

तालीमी कांफ्रेंस में अभिवावकों एवं छात्र -छात्राओं को संबोधित करते हुए जयपुर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अभिषेक सिद्ध ने बताया कि शिक्षा केवल हमें केवल बड़ा अधिकारी या शिक्षक नहीं बनाती, शिक्षा हमें जीवन जीना सिखाती है। उन्होंने बताया कि सफलता के लिए मुख्यत: तीन चीजें होती हैं, सबसे पहले हमारा एक लक्ष्य होना चाहिए। जब तक हमारा लक्ष्य तय नहीं होगा तब तक हम उसे दिशा में प्रयास नहीं कर सकते। उसके बाद दूसरी चीज आती है सतत परिश्रम करना। कठोर परिश्रम तो जरूरी है ही साथ में सतत परिश्रम और सतत प्रयास करना भी बेहद जरूरी है। अधिकतर लोग इसलिए असफल नहीं होते कि उनमें प्रतिभा की कमी होती है बल्कि वह असफल इसलिए होते हैं कि वह सतत परिश्रम नहीं करते। उन्होंने थॉमस अल्वा एडिसन का उदाहरण देते हुए किया कि उन्हें 99 बार असफलता मिली लेकिन उन्होंने प्रयास करना नहीं छोड़ा आखिर 100वीं बार उन्होंने बल्ब बना कर साबित कर दिया के निरंतर परिश्रम से कामयाबी हासिल कि जा सकती है। तीसरा एवं महत्वपूर्ण बिंदु है आत्मविश्वास, जिस प्रकार छाता बारिश से तो नहीं बचा सकता लेकिन बारिश में खड़े होने का हौसला ज़रूर दे सकता है उसी प्रकार आत्मविश्वास सफलता की गारंटी नहीं देता लेकिन सफलता की दिशा में प्रयास करने का हौसला अवश्य देता है और आत्मविश्वास छोटी-छोटी सफलताएं प्राप्त करके आता है। अच्छा जीवन जीने के लिए हमें शिक्षा के साथ-साथ अपने अंदर अच्छे गुणों का विकास भी करना होगा। इस दौरान कार्यक्रम में नईम रब्बानी, शहजाद खान (आगाज फाउंडेशन), डॉ तनवीर, रजिया सुल्ताना, प्रिया खान, अमीन कायमखानी, शाहनवाज लाला, डॉ. अब्दुल रहीम, फरहान इसराइली, हाजी नवाब अली चिराणिया, मंसूर आलम, मसूद अख्तर व रियाज मोहम्मद इत्यादि समाज के प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
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