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DUSU चुनाव परिणाम 2025 : ABVP का जलवा, आर्यन मान बने प्रेसिडेंट

नई दिल्ली

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नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव के नतीजे आ गए हैं और एक बार फिर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शानदार प्रदर्शन किया है। ABVP के उम्मीदवार आर्यन मान ने प्रेसिडेंट पद पर जीत हासिल की है। इसके साथ ही सचिव और जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर भी ABVP के उम्मीदवार विजयी रहे हैं। जबकि वाइस-प्रेसिडेंट पद पर NSUI के राहुल झांझला ने जीत दर्ज की है।

चुनावी प्रक्रिया और उम्मीदवार

DUSU चुनाव को दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का सबसे अहम इवेंट माना जाता है। इस बार चुनाव 18 सितंबर को दो शिफ्ट में हुए। कुल मिलाकर हजारों छात्रों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

प्रेसिडेंट पद के लिए कुल 21 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें मुख्य मुकाबला तीन चेहरों के बीच देखा गया—

ABVP से आर्यन मान, NSUI से जोशलिन नंदिता चौधरी, लेफ्ट यूनियन से अंजलि

इनके अलावा अन्य स्वतंत्र उम्मीदवार भी चुनाव में उतरे, लेकिन असली जंग ABVP और NSUI के बीच रही।

परिणाम और माहौल

गिनती पूरी होने के बाद सबसे पहले प्रेसिडेंट पद का नतीजा आया, जिसमें ABVP के आर्यन मान को निर्णायक बढ़त मिली और उन्होंने जीत हासिल की। जैसे ही यह खबर सामने आई, ABVP समर्थकों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में जोरदार जश्न मनाया। ढोल-नगाड़ों, पटाखों और नारेबाजी के बीच समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाई। वाइस प्रेसिडेंट पद पर NSUI के राहुल झांझला की जीत विपक्षी खेमे के लिए राहत लेकर आई। सचिव और जॉइंट सेक्रेटरी पदों पर ABVP का कब्जा होना यह दर्शाता है कि संगठनात्मक स्तर पर ABVP की पकड़ अब भी मज़बूत है।

ABVP और NSUI की रणनीति

इस बार के चुनाव में ABVP ने “नेशन फर्स्ट, स्टूडेंट फर्स्ट” का नारा दिया। कैंपस की सुरक्षा, नई छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल, हॉस्टल सुविधाओं में सुधार और सस्ती कैंटीन जैसी मांगों को मुख्य मुद्दा बनाया गया। वहीं NSUI ने बेरोजगारी, शिक्षा की बढ़ती फीस और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाया। उनका दावा था कि छात्र हितों के लिए वास्तविक लड़ाई वही लड़ सकते हैं। लेफ्ट संगठनों ने कैंपस में लोकतांत्रिक माहौल, समान अवसर और सांस्कृतिक विविधता को अपना एजेंडा बनाया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व

DUSU चुनाव सिर्फ छात्र राजनीति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालते हैं। यहां से निकलने वाले कई छात्र नेता आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि सभी बड़े दल इन चुनावों को गंभीरता से लेते हैं और अपने-अपने छात्र संगठनों को सक्रिय समर्थन देते हैं। इस बार भी चुनाव में राजनीतिक दलों की दिलचस्पी साफ दिखी। ABVP की जीत को बीजेपी समर्थक छात्र राजनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। वहीं NSUI ने वाइस प्रेसिडेंट पद जीतकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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आर्यन मान की प्रतिक्रिया

जीत के बाद प्रेसिडेंट बने आर्यन मान ने कहा— “यह जीत सिर्फ मेरी नहीं बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय के हर उस छात्र की है, जिसने बदलाव पर भरोसा जताया। हमारी प्राथमिकता छात्रों की समस्याओं का हल निकालना और बेहतर कैंपस माहौल बनाना होगा।” उनका यह बयान इस ओर संकेत करता है कि वे छात्र हितों के मुद्दों पर सक्रियता दिखाएंगे।

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