बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान के कारण दलित, पिछड़े और गरीब देश की मुख्य धारा में शामिल हो रहे हैं
- बाबा साहब के बनाए संविधान के कारण ही वर्तमान में देश की राष्ट्रपति दलित, प्रधानमंत्री ओबीसी (पिछड़ा वर्ग), कई राज्यों के मुख्यमंत्री दलित, पिछड़ा वर्ग से बन सके हैं। राजनीति से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाला भारत दलित, पिछड़े, आदिवासियों के वर्चस्व वाला होगा।
जयपुर, ( रॉयल पत्रिका)। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 14 अप्रैल को जयंती मनाई जा रही है। देश में सभी राजनीतिक दल और उनके नेता डॉ. भीमराव आंबेडकर को याद कर रहे हैं। देश का कोई भी राजनीतिक दल हो, उनकी कैसी भी विचारधारा हो लेकिन देश के संविधान निर्माता और देश के प्रथम कानून मंत्री महामानव डॉ. आंबेडकर और दलित, पिछड़ों और आदिवासियों को नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं। देश में बाबा साहब के बनाए गए संविधान के कारण ही सवर्ण वर्ग को दलितो, पिछड़ों और आदिवासियों के साथ छुआछूत छोड़नी पड़ी है एवं जो भी देश में छुआछूत बची है वह भी छोड़नी पड़ेगी। बाबा साहब के संविधान के कारण ही देश में शिक्षा, समानता एवं मानवता का शासन कायम होने की और अग्रसर है। बाबा साहब के संविधान के द्वारा दिए गए समानता के अधिकार के कारण वर्तमान में भारत देश की राष्ट्रपति एक दलित महिला है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछड़े वर्ग से। देश का कोई भी राजनीतिक दल, सामाजिक संस्था और आर्थिक ग्रुप देश के दलितों, पिछड़ों एवं आदिवासियों को नजर अंदाज करने की स्थिति में नहीं है। भविष्य के भारत में दलितों पिछड़ों और आदिवासियों का शासन और प्रशासन में बोलबाला रहने वाला है। स्वतंत्रता के दशकों तक राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री, केंद्र के मंत्री, देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति उच्च वर्ग का है बनता था। लेकिन जैसे-जैसे बाबा साहब के बनाए संविधान ने चमत्कार दिखाना शुरू किया तो स्थिति बदलती गयी। स्थिति बदलने की प्रक्रिया अभी भी जारी है। एक दिन आने वाला है कि देश का शासन पूरी तरह दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के हाथों में रहेगा। आज बाबा साहब के बताए रास्ते पर चलने वाले करोड़ों की संख्या में मौजूद है। बाबा साहब की शिक्षाएं देश के बहुसंख्यकों को तेजी से प्रभावित कर रही है।
- बाबा साहब का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था
भीमराव रामजी अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उनका परिवार आधुनिक महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के अंबाडावे (मंडनगढ़ तालुका) शहर से मराठी पृष्ठभूमि का था। अम्बेडकर का जन्म महार (दलित) जाति में हुआ था, जिनको अछूत माना जाता था और सामाजिक-आर्थिक भेदभाव किया जाता था। अम्बेडकर के पूर्वजों ने लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना के लिए काम किया था, और उनके पिता महू छावनी में ब्रिटिश भारतीय सेना में कार्यरत थे। रामजी सकपाल 1894 में सेवानिवृत्त हुए और दो साल बाद परिवार सतारा चला गया। उसके बाद उनकी मौसी ने उनकी देखभाल की। रामजी सकपाल परिवार के साथ मुंबई चले आये। अप्रैल 1906 में, जब भीमराव लगभग 15 वर्ष आयु के थे, तो नौ साल की लड़की रमाबाई से उनकी शादी कराई गई थी। तब वे पांचवी अंग्रेजी कक्षा पढ़ रहे थे। एक भारतीय न्यायविद, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और राजनीतिक नेता थे, जिन्होंने संविधान सभा की बहसों से भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व किया, पहली कैबिनेट में कानून और न्याय मंत्री के रूप में कार्य किया। भीमराव रामजी अम्बेडकर बॉम्बे विश्वविद्यालय के एलफिंस्टन कॉलेज से स्नातक करने के बाद, कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र का अध्ययन किया। इसके बाद उन्हें 1927 और 1923 में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और 1920 के दशक में किसी भी संस्थान में ऐसा करने वाले कुछ भारतीय छात्रों में से एक थे। उन्होंने ग्रेज़ इन, लंदन में कानून का प्रशिक्षण भी लिया। अपने शुरुआती करियर में, वह एक अर्थशास्त्री, प्रोफेसर और वकील थे। 1990 में, भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न, अम्बेडकर को मरणोपरांत प्रदान किया गया।
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