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अमेरिका की दखलअंदाजी पर देश के लोगों को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी याद आने लगी

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  • भारत जीत रहा था फिर भी क्यों किया युद्ध विराम?
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने की युद्ध विराम की घोषणा
  • देश की जनता नाराज दिखाई दे रही है पाकिस्तान के साथ युद्ध विराम से

एम. खान

जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत पाकिस्तान युद्ध में ठीक-ठाक निर्णय ले रहे थे।देश की सेना ने भी अपना पराक्रम दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ी, देश का हर वर्ग, समाज और समुदाय एक कदम ताल की तरह पाकिस्तान के विरोध में सक्रिय था। दो-तीन दिन के युद्ध में पाकिस्तान घुटनों के बल आता दिखाई दे रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में भी कहा जाने लगा था कि वह स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरह पाकिस्तान का विभाजन करके इंदिरा गांधी की बराबरी करके ही दम लेंगे।लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में युद्ध रोकने के लिए तैयार हो गए, जबकि युद्ध में भारत ने पाकिस्तान पर बढ़त बना ली थी। युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के ठिकानों, एयरपोर्टों, बंदरगाहों एवं परमाणु ठिकानों के आस-पास एयर स्ट्राइक करके पाकिस्तान को काफी दबाव में ला दिया था। हर भारतीय उत्सुकता से देख रहा था कि भारत के साथ पाकिस्तान का यह आखिरी युद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दबाव में आ गए और दबाव में युद्ध रोकने पर राजी हो गए। देश की जनता सोचने पर मजबूर दिखाई दी कि अचानक प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा क्यों किया? जनता सोच भी नहीं पा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युद्ध करने से क्यों रुके ? इसी बीच देश में सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का वीडियो वायरल होने लगा।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करने लगी देश की जनता

जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीच सीजफायर की घोषणा की, देश की जनता का हर वर्ग अचंभित हो गया। ऐसे कैसे हो सकता है? जब भारत जीत रहा है तो युद्ध विराम की क्या जरूरत थी, वह भी अमेरिका के दबाव में युद्ध विराम के कुछ समय बाद ही सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी का 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय का वीडियो वायरल हो गया। देश के लोग कहने लगे कि इंदिरा गांधी की बराबरी करना आसान नहीं है। 1971 के युद्ध में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति निक्सन ने भारत पाकिस्तान युद्ध में दखल देने की कोशिश की थी और भारत पर दबाव बनाया था, जब दबाव नहीं माना गया तो अमेरिका ने हिंद महासागर में अपना सातवां बेड़ा पाकिस्तान के पक्ष में और भारत पर सैनिक कार्रवाई के लिए भेज दिया था। उसी समय स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने कहा था कि अमेरिका सातवां बेड़ा भेजे या सत्रहवां बेड़ा भेजे, हम पाकिस्तान को सबक सिखा कर ही रहेंगे। अमेरिका हमारे बीच दखल देने वाला कौन होता है? इंदिरा गांधी ने सेना को पूरी खुली छूट दी थी और दुनिया का बाहरी दबाव स्वयं ने झेला और सेना को अपना काम करने दिया । नतीजा युद्ध के कुछ समय बाद ही पाकिस्तान के 93 हज़ार सैनिकों ने सरेंडर कर दिया और बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग कर दिया गया।

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