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‘हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड’ घोटाले पर बवाल, आमने-सामने आए डोटासरा और दिलावर

‘हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड’ घोटाले पर बवाल, आमने-सामने आए डोटासरा और दिलावर

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जयपुर। राजस्थान में हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड में करोड़ों के गबन को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। जिसके जवाब में दिलावर ने डोटासरा को ‘मानसिक असंतुलित’ बताते हुए इलाज कराने की सलाह दे डाली है। डोटासरा के आरोपों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री उनके मित्र हैं, लेकिन वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। दिलावर ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से उनका जल्द इलाज कराने की बात कही। दिलावर ने कहा कि डोटासरा के सभी आरोप निराधार हैं।

आपको बता दें कि गोविंद सिंह डोटासरा ने शिक्षा मंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए उदयपुर की एक संस्था से जुड़े कथित घोटाले का मुद्दा उठाया। जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोटासरा ने कहा कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि छात्रों के साथ धोखाधड़ी का भी है। उन्होंने राज्य सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की।

संस्था के गठन और संशोधन पर उठाए सवाल

डोटासरा ने बताया कि “हिंदुस्तान स्काउट गाइड जिला उदयपुर” नाम की संस्था सहकारिता विभाग के तहत पंजीकृत है और शुरुआत में यह एक जिले तक सीमित थी। उन्होंने कहा कि 22 नवंबर 2024 को संस्था में संशोधन किया गया, जिसके बाद इसके ढांचे और कार्यक्षेत्र में बदलाव आया। उनके अनुसार, संस्था में मदन दिलावर अध्यक्ष और नरेंद्र औदिच्य सचिव के रूप में जुड़े हैं। ऐसे में संस्था के कामकाज और निर्णयों की जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व पर ही तय होती है।

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प्रशिक्षण के नाम पर छात्रों से वसूली का आरोप

डोटासरा ने कहा कि शिविरों में अधिक पैसे लिए गए, लेकिन संस्था के खाते में जमा नहीं हुए। साथ ही उन्होंने भर्ती कराने के नाम पर पैसे लेने के भी आरोप लगाए। हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड मामले को लेकर डोटासरा ने कहा कि निजी खातों में पैसे लिए गए। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि खाली प्रमाण-पत्र बांटे जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मंत्री मदन दिलावर के पीए कैंपों में जाते हैं, उनका वहां क्या काम है? डोटासरा ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जैसे ही जांच की बात की गई, मंत्री ने उन्हें मानसिक रूप से असंतुलित बता दिया। वह विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएंगे। उन्होंने कहा कि उन पर भी पेपर लीक के आरोप लगे थे, तब उन्होंने खुद जांच कराने की बात कही थी लेकिन मंत्री जांच से क्यों डर रहे हैं?

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संस्था ने विभिन्न जिलों में शिविर आयोजित कर छात्रों से प्रशिक्षण के नाम पर पैसे वसूले। डोटासरा के मुताबिक, करीब 13 हजार छात्रों से 300 रुपये प्रति छात्र लिए गए। उन्होंने कहा कि यह राशि संस्था के आधिकारिक खाते में जमा होने के बजाय निजी खातों में जमा करवाई गई, जो गंभीर वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। उन्होंने इसे लाखों रुपये के संभावित गबन का मामला बताया।

CSR फंड के दुरुपयोग

डोटासरा ने यह भी आरोप लगाया कि संस्था ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों से पैसे लिए गए या जिन्होंने इस मामले में आवाज उठाई, उन्हें कथित रूप से धमकाया गया। उनके अनुसार, इस संस्था के खिलाफ पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे संदेह और गहरा होता है।

मंत्री के बयान पर पलटवार

प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोटासरा ने शिक्षा मंत्री के उस बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्हें “पागल” कहा गया था और मनोरोग चिकित्सक को दिखाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियां करके असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। डोटासरा ने कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो मंत्री तथ्यों के साथ सामने आकर सफाई दें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती है, तो कांग्रेस न्यायिक विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगी। फिलहाल इन आरोपों पर शिक्षा मंत्री की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है।

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