क्या चुनाव आयोग भाजपा और एनडीए को जिताने का काम करता है?
भारत के चुनाव आयोग की विश्व में चर्चा
भारत के चुनाव आयोग की विश्व में चर्चा हो रही है। भारत के चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार देश के सबसे चर्चित व्यक्ति बन गए हैं।
वर्तमान चुनाव आयोग पर आरोप
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार देश के ऐसे चुनाव आयुक्त हैं जो किसी शिकायत और चुनावी गड़बड़ी का जवाब ही नहीं देना चाहते हैं। इसके उलट आरोप लगाने वालों और विपक्षी दलों पर मुकदमा चलाने की धमकी देते हैं। देश में चुनाव आयोग पर विपक्षी नेता, समाजसेवी, वकील और बुद्धिजीवी चुनाव में धांधली और पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग किसी भी आरोप की सफाई देना उचित नहीं समझता है। देश में पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि डेमोक्रेसी के नाम पर चुनाव प्रक्रिया एक औपचारिकता भर रह गई है।
चुनावी परिणामों पर संदेह
चुनावी परिणामों के विश्लेषण से पता चलता है कि सब कुछ पहले ही निश्चित कर दिया जाता है। एक पार्टी को बम्पर बहुमत कैसे मिल जाता है, जबकि वही पार्टी पिछले पांच वर्षों से सत्ता में है। उस विशेष पार्टी का राज्य एवं देश में इतना अच्छा काम भी नहीं है और जनता उसके शासन से सन्तुष्ट भी नहीं है। चुनावी माहौल भी इतना पक्ष में दिखाई नहीं देता है जितने विजयी परिणाम सामने आते हैं।
वर्तमान बनाम पूर्व के आयोग
पूर्व के चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग चुनावी गड़बड़ी, पक्षपात और चुनावी भ्रष्टाचार पर तत्काल कार्यवाही करने के लिए जाने जाते हैं। जबकि वर्तमान चुनाव आयोग चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान खुलेआम सरकारी पैसे को बांटने पर भी कोई कार्यवाही नहीं करता है।
बिहार चुनाव का उदाहरण
बिहार में महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये आए। यह रुपये विधानसभा चुनाव अधिसूचना से पहले और चुनावों के दौरान आए। लेकिन चुनाव आयोग ने कोई एक्शन नहीं लिया। नतीजा सबके सामने है। बिहार चुनाव में एकतरफा परिणाम आए।
तमिलनाडु उपचुनाव का उदाहरण
दूसरी तरफ 2017 में तमिलनाडु में विधानसभा उपचुनाव की 12 अप्रैल तारीख तय की थी। सब कुछ सामान्य चल रहा था। तभी चुनाव आयोग ने 9 अप्रैल को मतदान से तीन दिन पहले एक बयान जारी कर कहा कि मतदाताओं को बड़े पैमाने पर धन, उपहार और अन्य प्रलोभनों के जरिए प्रभावित किया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। इस कारण मतदान स्थिगित किया जाता है। देश में ऐसे दूसरे उदाहरण भी हैं जब चुनाव में गड़बड़ियों की शिकायत पर चुनाव आयोग ने बड़ी कार्यवाही की थी।
देश की जनता बेबस
लेकिन वर्तमान चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी की चुनाव जिताने वाली एजेंसी बन कर रह गया है। चुनाव आयोग के कारण देश की जनता बेबस नजर आने लगी है। जनता के मताधिकार के अधिकार को छीनने की कोशिश की जा रही है। चुनाव आयोग के कारण देश में अशांति का माहौल बनने लगा है। डेमोक्रसी को खतरा पैदा हो गया है। चुनाव प्रक्रिया केवल दिखावा साबित हो रही है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि चुनाव आयोग भाजपा और एनडीए को जिताने के लिए काम करता है।
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