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क्या आरएसएस प्रमुख भागवत की बात नहीं मानते अनुषांगी संगठन ?

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एम. खान

जयपुर(रॉयल पत्रिका)। हर दिन नया विवाद उठाया जा रहा है। इसकी अनुमति कैसे दी जा सकती है? भारत को यह दिखाने की जरूरत है कि हम साथ साथ रह सकते हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद कुछ लोग सोचने लगे हैं कि ऐसे मुद्दे उठाकर हिन्दुओं के नेता बन सकते हैं। यह स्वीकार्य नहीं है। भक्ति के सवाल पर बात करें तो राम मन्दिर होना चाहिए और हुआ, पर रोज नए मुद्दे उठाकर घृणा –दुश्मनी फैलाना उचित नहीं है। यह बातें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने मंदिर-मस्जिद विवाद फिर से उभरने पर कहीं। भागवत पिछले सप्ताह पुणे में ”भारत विश्व गुरू“ विषय पर आयोजित प्रोग्राम में अपना भाषण दे रहे थे। उन्होंने कहा कि हम लंबे समय से सद्भावना से रह रहे हैं। दुनिया को सद्भावना सिखाना चाहते हैं, हमें मॉडल बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गौरतलब है कि हाल में मस्जिदों के सर्वेक्षण की कई मांगे कोर्ट पहुंची हैं, हालांकि भागवत ने किसी का नाम नहीं लिया। ज्यादातर भाजपा शासित प्रदेशो में मन्दिर, मस्जिद एवं दरगाहों की राजनीति की जा रही है।

अनुषांगी संगठन नहीं मानते भागवत की-

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने दर्जनों ऐसे संगठन बना रखे हैं जो आरएसएस के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की पूर्ति के लिए काम करते हैं। इनमें हिन्दुत्व एवं भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का एजेण्डा भी है। इसकी पूर्ति के लिए यह संगठन आए दिन मन्दिर मस्जिद का विवाद सामने लाते हैं। ”पूजा अधिनियम 1991“ इनके लिए कोई मायने नहीं रखता है। भागवत ने पूर्व में 3 जून 2022 को कहा था कि इतिहास में हुई गलतियों को भूलाकर हिंदुओं को हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग नहीं ढूंढना चाहिए। लेकिन आएएसएस के अनुषांगी संगठनों के प्रमुख और कार्यकर्ता भागवत की बात को अहमियत नही दे रहे हैं। इससे यह संदेश जा रहा है कि हिन्दु संगठनों में प्रचार पाने की प्रतियोगिता जोरों पर है। कई भाजपा नेता मुसलमानों के खिलाफ अनर्गल बातें करके बड़े एवं राष्ट्रीय नेता बनने की कतार में लगे हुए हैं। क्योंकि भाजपा में सैंकड़ों नेता ऐसी बातें और राजनीति करके उच्च पदों पर पहुंच चुके हैं। इसलिए इन संगठनों के कार्यकर्ता भी सरकार से कुछ पाने के लिए हिन्दू मुस्लिम की राजनीति करते रहते हैं।

क्या भागवत ईमानदारी से सद्भावना का संदेश देना चाहते हैं ?-

देश में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एक ऐसा ताकतवर संगठन हैं जो देश की केन्द्र एवं दर्जनों सरकारों पर नियंत्रण रखता है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत की बात या आदेश को प्रधानमंत्री एवं सरकार में बैठे उच्च अधिकारी नजर अदाज करने की स्थिति में नहीं हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अनुषांगी संगठन संघ प्रमुख  भागवत की मंशा के खिलाफ नहीं जा सकते हैं। कोई भाजपा नेता उनके मना करने के बाद अनर्गल भाषणबाजी नहीं कर सकता है। यह तब ही हो सकता है जब संघ प्रमुख केवल मंचों से भाषण में सद्भावना की बातें करते हैं। लेकिन अपने संगठन और अनुषांगी संगठनों को ऐसा करने के लिए आदेशित नहीं करते होंगे, क्योंकि संघ प्रमुख की बातें टालने की भाजपा सरकार के नेताओं में क्षमता नहीं है। संघ प्रमुख दुनिया के प्रमुख शक्तिशाली व्यक्तियों में शामिल हैं।

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