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भाग्यशाली लोगों को मिलती है ‘दो जून की रोटी’, जानिए-कहावत का मतलब

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Do June Ki Roti : नई दिल्ली। बचपन से भी हम कई तरह की कहावतें और मुहावरें सुनते आ रहे हैं। इन्हीं में से एक है दो जून की रोटी। जिसे आपने कई सारी कहानियों में पढ़ा या सुना होगा। इतना ही नहीं कई हिंदी फिल्मों में भी आपने हीरो को यह डायलॉग मारते सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी इसका असल मतलब जानने की कोशिश की। आज तक कई लोगों को ऐसा लगता होगा कि जून की 2 तारीख को खाई जाने वाली रोटी दो जून की रोटी कहलाती है, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।

कल दो जून है। दो जून आते ही सोशल मीडिया पर ‘दो जून की रोटी’ वाले जोक्स और कहावतें तैरने लगती हैं। इसमें से कुछ लोग बताते हैं कि आखिर में दो जून की रोटी कमाना कितना मुश्किल है तो कुछ कहते हैं कि वे बहुत भाग्यशाली हैं कि वे दो जून की रोटी खा पा रहे हैं। दरअसल, दो जून की रोटी का 2 तारीख से कोई लेना-देना नहीं है। यह कहावत लोगों के संघर्ष और असल जीवन को दर्शाती है। असल में यह एक अवधी कहावत है, जिसका मतलब दो वक्त की रोटी होता है। इस कहावत में जून का मतलब महीना नहीं, बल्कि वक्त या समय है।

कैसे हुई कहावत की शुरुआत?

इस कहावत की शुरुआत एक खास तबके के लोगों ने की थी। दरअसल, पुराने जमाने में जब गरीबी अपने चरम पर थी, तो लोगों को दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से नसीब होती थी। अगर दिन में खाना मिल गया, तो रात भूखे पेट की गुजारनी पड़ती थी और अगर रात में खाना मिल जाए, तो दिनभर भूखा रहना पड़ता था। दोनों की वक्त की रोटी कमाने के लिए लोगों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी, इसलिए यह कहावत उस दौर से चलन में है। आज भी लोग मेहनत कर दो जून की रोटी कमाते हैं।

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सबके नसीब में नहीं है दो जून की रोटी

इंसान की जो सबसे आम जरूरत है, वह भोजन ही है। खाने के लिए ही इंसान क्या नहीं करता है। नौकरी, बिजनेस करने वाले से लेकर गरीब तक, हर शख्स भोजन के लिए ही काम करता है।
कई दशकों से सरकारें देश में गरीबी को मिटाने के लिए कई योजनाएं लेकर आती रही हैं। करोड़ों-अरबों रुपए इन योजनाओं के जरिए गरीबी मिटाने पर होता रहा है, लेकिन उसके बावजूद भी आज के समय करोड़ों लोग हैं, जिन्हें दो जून की रोटी तक नसीब नहीं होती है। साल 2017 में आए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, देश में 19 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें सही तरीके से भोजन नहीं मिल पा रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि करोड़ों लोगों को आज भी भूखे पेट ही सोना पड़ता है। हालांकि, सभी लोगों को दो जून की रोटी नसीब हो सके, इसके लिए केंद्र सरकार कोरोनाकाल से ही मुफ्त में राशन मुहैया करवा रही है, जिसका 80 करोड़ जनता को सीधा फायदा मिल रहा है।

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