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 मुसलमानों का विकास बिना सरकारी योजनाओं के संभव नहीं है!

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  • कांग्रेस शासन में मुसलमानों के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया तो दूसरी तरफ बीजेपी सरकारी योजनाओं में बजट कम कर रही है

जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। देश में मुस्लिम वर्ग को लेकर राजनीति चरम सीमा पर है। केंद्र की भाजपा सरकार बहुसंख्यकों के विकास पर कितना ध्यान दे रही है,  कुछ कहा नहीं जा सकता है। लेकिन अल्पसंख्यक वर्ग विशेष कर मुस्लिम वर्ग के बारे में काफी चिंतित दिखाई देने लगी है। यह चिंता मुसलमानों के विकास को लेकर है या मुसलमानों को हाशिए पर ढकेलने के लिए, जानने की जरूरत है। मोदी सरकार के 11 वर्ष के शासन काल में कम से कम 5 प्रमुख विधेयक पेश किये, जो प्रत्यक्ष या परोक्षरूप से मुस्लिम समुदाय से संबंधित हैं। इनमें है-नागरिकता संशोधित विधेयक (CAA),जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक- 2019, मुस्लिम महिला (तीन तलाक विधेयक) 2017- 2019 एवं वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2024- 2025 और मुसलमान वक़्फ़ (निरसन) विधेयक 2024-25 शामिल है ।इन विधेयकों को संसद में पेश करने से मुस्लिम समुदाय का कितना लाभ होगा या हुआ है, यह तो नहीं कहा जा सकता। लेकिन इन विधेयकों के संसद में पास करवाने के समय देश के पूरे मुस्लिम समुदाय ने पुरजोर विरोध किया और मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों एवं नागरिक अधिकारों में दखल बताया। इसके अलावा भाजपा सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए चल रही विकास योजनाओं के बजट में कमी की और छात्र-छात्राओं को मिलने वाली छात्रवृत्ति में कटौती की है। केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जौहर यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी सहित विभिन्न विख्यात मदरसों के संचालन में दखल देने की कोशिश की है। देश के विभिन्न भागों में मॉबलिंचिंग हुई, बुलडोजर से मकान ढहाए गए। लेकिन सरकार ने मुस्लिम संरक्षण के लिए कोई विशेष उपाय नहीं किया। जबकि सरकार सबका साथ और सबका विकास समान रूप से करने की बात करती है।

कांग्रेस का शासनकाल 1947 से लेकर 2014 तक

देश में मुसलमानों का कितना विकास हुआ, इसकी भी जानकारी जरूरी है। इस समयकाल में जो मुस्लिम आर्थिक एवं व्यावसायिक रूप से सक्षम थे, उन्होंने काफी तरक्की की थी। लेकिन ऐसे लोगों और परिवारों की संख्या काफी कम थी। देश के वैज्ञानिक, राष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री एवं सरकारी अधिकारी बने। लेकिन दूसरी तरफ जो लोग गरीब थे, वे और गरीब होते चले गए। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में कांग्रेस सरकार ने अच्छे स्कूल, अस्पताल और बैंक खोलने की जरूरत महसूस नहीं की। यही कारण है कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में मुसलमानों को दलितों से भी पिछड़ा हुआ बताया गया। कांग्रेस शासन में मुसलमानों के युवाओं की गुंडागर्दी, चाकूबाजी, तस्करी एवं गैंगस्टर चलाने में रुचि बढ़ाने लग गई थी। ऐसे लोगों ने कानून हाथ में लेकर पूरे मुस्लिम समुदाय को बदनाम किया। उन्हीं के कारण मुस्लिम क्षेत्रों में सरकारों को जगह स्कूल, कॉलेज, अस्पताल की जगह पुलिस थाने, पुलिस चौकियां या पुलिस ट्रेनिंग सेंटर खोलने पड़े। ऐसे लोगों के कारण आए दिन दंगे फसाद और लड़ाई- झगड़े की बातें होने लगी। पढ़ाई, रोजगार एवं सामाजिक सुधार की बातें मुस्लिम युवा आज भी नहीं करते हैं। कांग्रेस की तरफ से पूरी छूट दी गई, क्योंकि कांग्रेस को वोट लेकर सत्ता में बने रहना था और मुसलमानों की नाराजगी से डरती थी । मुसलमानों का विकास कांग्रेस की प्राथमिकता में नहीं था।

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