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करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी सड़कों, गलियों एवं रास्तों में गंदगी

जयपुर

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जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और सिस्टम में गहरी खामियां नजर आ रही हैं

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान की राजधानी जयपुर, जिसे ‘गुलाबी नगरी’ के नाम से जाना जाता है, आज नगर निगम की लापरवाही के कारण गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। शहर के कई इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली साफ नजर आ रही है। गंदे सार्वजनिक शौचालय, कचरे से अटी सड़कें और खुले बिजली के तार न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं, बल्कि आम लोगों की जान को भी खतरे में डाल रहे हैं।

सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली और गंदगी

शहर के प्रमुख इलाकों जैसे सीताराम बाजार, ब्रह्मपुरी और शंकर नगर में बने सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है।

  • गंदगी का अंबार: इन शौचालयों में लंबे समय से सफाई नहीं हुई है।

  • दुर्गंध: तीव्र बदबू के कारण आसपास के लोगों का रहना मुश्किल हो गया है।

  • रखरखाव का अभाव: करोड़ों के बजट के बावजूद साफ-सफाई की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।

खुले बिजली के तार: मौत को न्योता

शंकर नगर इलाके में हालात और भी चिंताजनक हैं। यहां कई स्थानों पर बिजली के तार खुले हुए नजर आते हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं।

  • जानलेवा खतरा: बरसात के मौसम में ये खुले तार जानलेवा साबित हो सकते हैं।

  • प्रशासनिक मौन: बिजली विभाग और नगर निगम इस गंभीर खतरे के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

सड़कों पर कचरा और बीमारियों का डर

शंकर नगर सहित शहर के कई अन्य इलाकों में सड़कें कचरे से भरी पड़ी हैं। जगह-जगह प्लास्टिक, गीला कचरा और मलबा जमा होने से निम्नलिखित समस्याएं पैदा हो रही हैं:

  1. आवाजाही में बाधा: सड़कों पर फैला मलबा यातायात को प्रभावित कर रहा है।

  2. स्वास्थ्य संकट: मच्छरों के पनपने और बदबू के कारण स्थानीय निवासियों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

  3. दावों की पोल: नगर निगम के ‘स्वच्छ जयपुर’ के दावों की हकीकत इन गलियों में साफ देखी जा सकती है।

[यहाँ कचरे से अटी सड़क या खुले बिजली के तारों की फोटो लगाई जा सकती है]

सिस्टम की विफलता पर बड़े सवाल

नगर निगम हर साल सफाई और रखरखाव के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये खर्च करता है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

मुख्य सवाल:
  • क्या यह लापरवाही केवल जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का नतीजा है?

  • क्या बजट का सही इस्तेमाल धरातल पर हो रहा है या यह सिस्टम की गहरी खामी है?

निष्कर्ष

गुलाबी नगरी की सुंदरता पर नगर निगम की यह लापरवाही एक बड़ा धब्बा है। यदि समय रहते इन बुनियादी समस्याओं (सफाई और बिजली सुरक्षा) पर ध्यान नहीं दिया गया, तो शहरवासियों को भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

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