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राजस्थान में सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021को रद्द करने की मांग जोरों पर

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राजस्थान में 2021 की सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के कारण विवादों में घिरी हुई है। इस परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर न केवल अभ्यर्थी और उनके परिवार, बल्कि कई राजनीतिक दल भी सड़कों पर उतर आए हैं। यह मुद्दा अब न केवल शैक्षिक और प्रशासनिक पारदर्शिता का सवाल बन गया है, बल्कि यह राजस्थान की युवा शक्ति के भविष्य और सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठा रहा है। सितंबर 2021 में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में 859 पदों के लिए 7.97 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। यह परीक्षा 13, 14, और 15 सितंबर को 11 जिलों के 802 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। फरवरी 2024 में राजस्थान पुलिस के विशेष कार्य बल (SOG) ने पेपर लीक की पुष्टि की, जिसमें जयपुर के रविंद्र बाल भारती सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हसनपुरा से पेपर लीक होने की बात सामने आई। जांच में दो अलग-अलग गिरोहों का हाथ होने का खुलासा हुआ, जिन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से पेपर को प्रसारित किया था। SOG की जांच में अब तक 80 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 50 प्रशिक्षु सब इंस्पेक्टर और RPSC के दो पूर्व सदस्य, रामूराम रायका और बी.एल. कटारा, शामिल हैं। रायका पर आरोप है कि उन्होंने अपने बच्चों, शोभा और देवेश रायका, को लीक हुआ पेपर उपलब्ध करवाया, जिन्होंने क्रमशः 5वां और 40वां रैंक हासिल किया था। जांच में यह भी सामने आया कि कई टॉपर्स ने रीटेस्ट में खराब प्रदर्शन किया, जैसे शोभा रायका, जिन्होंने मूल परीक्षा में 343.52 अंक प्राप्त किए, लेकिन रीटेस्ट में हिंदी में केवल 24 और सामान्य ज्ञान में 34 सवाल ही सही कर पाईं। पेपर लीक के खुलासे के बाद अभ्यर्थियों और उनके समर्थकों ने परीक्षा को रद्द करने की मांग तेज कर दी। उनका तर्क है कि इस घोटाले ने मेहनती और ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया है, और केवल दोषियों को दंडित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जयपुर में अक्टूबर 2024 में अभ्यर्थियों ने रिद्धि सिद्धि स्क्वायर पर कैंडल मार्च निकाला और बीजेपी विधायक किरोड़ी लाल मीणा के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। वहीं, चयनित अभ्यर्थियों के परिवारों ने परीक्षा रद्द करने के विरोध में प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि सभी 859 चयनित अभ्यर्थियों को दोषी मानकर पूरी परीक्षा रद्द करना उन लोगों के साथ अन्याय होगा, जो बिना किसी गड़बड़ी के पास हुए हैं। उन्होंने मांग की कि केवल दोषी अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई हो और बाकी को उनकी ट्रेनिंग और नियुक्ति पूरी करने दी जाए।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP): RLP के नेता और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है । बेनीवाल ने युवाओं से एकत्र होने और शहीद स्मारक पर धरने में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि RLP हमेशा राजस्थान के मेहनतकश युवाओं के साथ खड़ी है। विपक्षी दल कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर इस मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सरकार की अनिर्णय की स्थिति के कारण युवा और जनता परेशान हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भर्ती प्रक्रिया में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की रुचि और सत्ता के गलियारों में “संदिग्ध सौदेबाजी” हो रही है।सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार इस मामले में दबाव में है। गृह मंत्रालय के नेतृत्व में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस मुद्दे पर कैबिनेट बैठक में चर्चा की, लेकिन दिसंबर 2024 में यह बैठक स्थगित हो गई, जिससे निर्णय में देरी हुई। बीजेपी विधायक किरोड़ी लाल मीणा ने अभ्यर्थियों के समर्थन में आवाज उठाई और कहा कि उन्हें रद्द करने का प्रस्ताव सौंपा गया है। हालांकि, सरकार ने राजस्थान हाई कोर्ट में कहा कि जांच पूरी होने तक परीक्षा रद्द करने का निर्णय नहीं लिया जा सकता।राजस्थान हाई कोर्ट ने 18 नवंबर 2024 को भर्ती प्रक्रिया पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, जिसके तहत 850 प्रशिक्षु सब इंस्पेक्टरों की नियुक्ति और ट्रेनिंग पर रोक लगा दी गई। कोर्ट ने 10 जनवरी 2025 को सुनवाई में स्पष्ट किया कि कोई भी नियुक्ति कार्रवाई अदालत की अवमानना मानी जाएगी। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता आर.डी. रस्तोगी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है ताकि इस मामले को सुलझाने में मदद मिल सके।

राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने SOG की जांच के आधार पर परीक्षा रद्द करने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा है, जिसे डीजीपी यू.आर. साहू ने आगे बढ़ाया। हालांकि, अंतिम निर्णय राज्य कैबिनेट के पास है, क्योंकि RPSC स्वतंत्र रूप से इस मामले में कार्रवाई नहीं कर सकता। सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने तक कोई जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जाएगा।

राजस्थान में सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 का पेपर लीक मामला एक जटिल समस्या बन चुका है, जिसमें प्रशासनिक विफलता, भ्रष्टाचार, और राजनीतिक हित एक साथ उलझे हैं। अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक दलों की सक्रियता, और कोर्ट की कार्रवाई इस मामले को और जटिल बना रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शी और त्वरित निर्णय ले ताकि मेहनती युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल हो। यह न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे देश के लिए एक सबक है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करना कितना जरूरी है।

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