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सीपी राधाकृष्णन ने ली भारत के 15वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ

नई दिल्ली

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राधाकृष्णन का कार्यकाल 11 सितंबर 2030 तक रहेगा

नई दिल्ली । भारत ने एक बार फिर लोकतंत्र की शक्ति और परंपरा का अद्भुत उदाहरण पेश किया है। चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन (सीपी राधाकृष्णन) ने शुक्रवार को देश के 15वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद और अनेक गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और वेंकैया नायडू ने भी समारोह में शिरकत की।

राधाकृष्णन का कार्यकाल और जिम्मेदारी

राधाकृष्णन का कार्यकाल 11 सितंबर 2030 तक रहेगा। उपराष्ट्रपति के रूप में उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी राज्यसभा के सभापति पद को गरिमा और निष्पक्षता के साथ निभाना होगी। यह पद न केवल संसदीय मर्यादा का प्रतीक है, बल्कि लोकतांत्रिक बहस और निर्णय प्रक्रिया को संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। राधाकृष्णन लंबे समय से भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उन्हें संगठन में मजबूत पकड़ और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया।

चुनावी जीत

9 सितंबर को हुए चुनाव में राधाकृष्णन ने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को हराकर यह महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। उन्हें कुल 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। इस तरह राधाकृष्णन ने 152 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह जीत न केवल एनडीए की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि संसद में उनकी स्वीकार्यता और समर्थन का भी संकेत देती है।

इस्तीफे के बाद दिखे जगदीप धनखड़

इस समारोह की एक और खास बात रही कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ लंबे समय बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे को 53 दिन हो चुके थे और इस बीच वे सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए थे। समारोह में उनकी उपस्थिति ने सबका ध्यान आकर्षित किया। धनखड़ ने अपने कार्यकाल में राज्यसभा को सुचारू रूप से चलाने और संसदीय परंपराओं की रक्षा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनकी कार्यशैली को लेकर कई बार बहस भी हुई, लेकिन यह स्वीकार किया जाता है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान उपराष्ट्रपति पद की गरिमा बनाए रखी।

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राजनीतिक और सामाजिक महत्व

सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना दक्षिण भारत के लिए भी एक अहम क्षण माना जा रहा है। तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले राधाकृष्णन का चयन यह संदेश देता है कि केंद्र सरकार और एनडीए दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक जड़ें और मजबूत करने की दिशा में गंभीर है। उनकी जीत से यह उम्मीद भी बंधती है कि राज्यसभा में बहसें और चर्चाएं अधिक सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक माहौल में होंगी। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संतुलन बनाए रखना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राधाकृष्णन को बधाई देते हुए कहा कि उनका अनुभव और विनम्रता राज्यसभा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। मोदी ने यह भी कहा कि राधाकृष्णन का सार्वजनिक जीवन स्वच्छ, पारदर्शी और समाज सेवा के आदर्शों से प्रेरित रहा है। ऐसे में देश को उनसे बहुत उम्मीदें हैं। भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन का चयन लोकतंत्र के लिए एक नया अध्याय है। उनका कार्यकाल न केवल संसदीय परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर होगा, बल्कि देश की एकता और विविधता को मजबूती देने का भी समय होगा। जैसे-जैसे वे अपनी जिम्मेदारियों को निभाएंगे, देश यह देखेगा कि कैसे एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद तक का सफर तय करने वाला व्यक्तित्व भारतीय लोकतंत्र की सच्ची ताकत को दर्शाता है। राधाकृष्णन का कार्यकाल निश्चित ही भारतीय राजनीति, संसद और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

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