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नेताओं का भ्रष्टाचार देश के लिए घातक !

Jaipur

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राजस्थान प्रदेश के कददावर नेताओं के एक-दूसरे पर लेनदेन के आरोप प्रदेश और देश की राजनीति में गिरते स्तर की ओर इंगित करते हैं। राज्यसभा में प्रत्याशी को पैसे लेकर वोट देना, विधानसभा और संसद में किसी बिल या प्रस्ताव पर पैसे लेकर समर्थन करना, विधानसभाओं और संसद में पैसे लेकर प्रश्न पूछना राजनीति में आम बात हो गई है। वोट काटने के लिए पार्टी बनाकर उम्मीदवार खड़ा करना, मजबूत उम्मीदवारों को वोट काटकर हराना, वोटरों को प्रलोभन देना और उसके बदले कीमत वसूल करना जैसी गतिविधियां नेताओं में अक्सर देखी जा सकती हैं। राजनीति को वर्तमान नेताओं ने व्यवसाय बना दिया है। देश में राजनीति के कारण जितना नुकसान हो रहा है, उतना किसी और कारण से नहीं हो रहा है। बड़ी-बड़ी कंपनियां, व्यवसायी नेताओं के जरिए अपने हित साध रहे हैं। वर्तमान में बड़ी-बड़ी कंपनियां और व्यवसायी देश की सरकार बनाने और बिगड़ने की स्थिति में पहुंच गए हैं। देश में कई बिजनेस घराने ऐसे हैं जिनके कारण सरकारें बन रही हैं और बिगड़ रही हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी कई बार आरोप लगा चुके हैं कि मोदी सरकार अडानी और अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही है। आरोप गंभीर हैं लेकिन कोई कुछ नहीं कह पा रहा है। सरकार में दखल रखने वाली कंपनियों को करोड़ों, अरबो रुपए के टेंडर आसानी से मिल रहे हैं। कंपनियों से सरकार में बैठे नेताओं और अधिकारियों को पैसा कमीशन के रूप में मिलता है। देश में खाद्य वस्तुएं, दवाइयां, कपड़े बड़े पैमाने पर घटिया या मिलावट करके बेचे जा रहे हैं। इन पर कोई कंट्रोल नहीं है या यह कहा जा सकता है कि सरकारी संरक्षण में यह सब किया जा रहा है। जनता बेबस है, कुछ नहीं कर पा रही है। पहले चुनाव में वोट देकर उम्मीदवार बदल देती थी। लेकिन अब जनता से भी वोट देकर नेता बदलने का अधिकार छीना जा रहा है। वोटर लिस्ट में फर्जी तरीके से वास्तविक वोटो को किसी न किसी बहाने हटा दिया जाता है और फर्जी वोटरों को जोड़ दिया जाता है। इसलिए कहा जा सकता है कि देश में लोकतंत्र की आड़ में धीरे-धीरे तानाशाही आती जा रही है। क्योंकि एक बार कोई भी नेता विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बन जाता है। वह पहले तो हटना नहीं चाहता और कोई हटाने की कोशिश करता है तो किसी भी प्रकार पदों पर कब्जा करने की कोशिश करता है। नेताओं पर देश के कानून कुछ ज्यादा असर कारक नहीं है। भाजपा नेता और मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सांसद हनुमान बेनीवाल पर राज्यसभा उम्मीदवार पैसा लेकर वोट देने की बात कही। वैसे तो प्रकरण की जांच होनी चाहिए और कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। उसी तरह सांसद हनुमान बेनीवाल ने मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर खाद बीज व्यवसायिक ठिकानों पर छापे मारने का मकसद पैसा वसूली बताया। यह भी गंभीर आरोप है और जांच का विषय है। लेकिन कुछ होना जाना नहीं है। सरकार नेताओं के नियंत्रण में है और जांच करने वाली एजेंसी नेताओं के इशारों पर काम करती है। जांच एजेंसियां थोड़ी बहुत जांच विपक्षी नेताओं की जरूर कर सकती है लेकिन सत्ता पक्ष के नेताओं की ओर देखना उनके वश की बात नहीं है।

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