कांग्रेस को लोकतंत्र पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं – मदन राठौड़
जयपुर । भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी का इतिहास लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के दमन से भरा हो, उसे आज RTI एक्ट या पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। राठौड़ ने डोटासरा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि “देश में 50 से ज्यादा सरकारें गिराने वाली कांग्रेस, संवैधानिक संस्थाओं को बंधक बनाने वाली कांग्रेस और तुष्टिकरण की राजनीति के ज़रिए समाज को बाँटने वाली कांग्रेस के नेता जब पारदर्शिता की बात करते हैं, तो यह ढोंग और दोहरा चरित्र ही नजर आता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि इतिहास से कांग्रेस की भूमिका को कोई नहीं भूल सकता। इंदिरा गांधी द्वारा चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को अदालत ने भी माना था। डोटासरा शायद यह भी भूल गए हैं कि इंदिरा गांधी ने अपने ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को हराने के लिए विपक्षी उम्मीदवार को समर्थन दिया था। कांग्रेस का इतिहास आपातकाल, सेंसरशिप और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन से भरा हुआ है। फिर कौनसी शुचिता की बात करती है कांग्रेस।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने स्पष्ट किया कि RTI को वास्तव में मजबूत करने का काम भाजपा सरकार ने किया है, जहाँ अब ई-गवर्नेंस, डिजिटल एफआईआर और समयबद्ध जवाबदेही को कानून का हिस्सा बनाया गया है। कांग्रेस सिर्फ भ्रम फैलाने और झूठ की राजनीति में माहिर है। डोटासरा ने पहले भी कृषि बिलों, महिला आरक्षण, और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जनता को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन हर बार सत्य सामने आया और कांग्रेस का चेहरा बेनकाब हुआ। जनता अब कांग्रेस के इन बयानवीर नेताओं के झांसे में आने वाली नहीं। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति राष्ट्रवाद, सुशासन और पारदर्शिता पर आधारित है। जबकि कांग्रेस अब भी धोखे, भ्रम और सत्ता की भूख के पुराने ढर्रे पर चल रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने डोटासरा के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि “डोटासरा जी कहते हैं कि मदन जी की बात का क्या जवाब दूं, तो मैं कहता हूँ कि उनके पास जवाब है ही नहीं, क्योंकि मैंने जो कहा वह तथ्य और सच्चाई पर आधारित है।” राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत प्रचार के लिए पहले गुजरात गए, कांग्रेस वहां हार गई। फिर महाराष्ट्र गए, वहां भी कांग्रेस की करारी हार हुई और अब वे बिहार जा रहे हैं, जहां कांग्रेस की हार तय है। यह स्पष्ट संकेत है कि जहां-जहां गहलोत जाते हैं, वहां से कांग्रेस साफ हो जाती है।
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