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CJI बीआर गवई ने दी युवाओं को ईमानदारी चुनने की सलाह

नई दिल्ली

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भारतीय न्याय व्यवस्था में ‘सुधार की सख्त जरूरत

नई दिल्ली। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत बताते हुए कहा कि आज न्यायालयों में लंबित मामलों और धीमी प्रक्रियाओं के कारण लोगों का न्याय पर विश्वास कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायिक सुधार सिर्फ सरकार या न्यायपालिका का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का विषय है और इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने यह बात शुक्रवार को ग्रेजुएट कर चुके छात्रों के एक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही। CJI ने कहा कि युवाओं को अपने करियर और जीवन में ईमानदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए और जब भी गुरु चुनें, तो उनकी शक्ति या रसूख देखकर नहीं, बल्कि उनकी ईमानदारी और उसूल देखकर चुनें।

भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार क्यों जरूरी?

CJI गवई ने कहा कि भारत में न्यायपालिका पर लोगों का भरोसा बना हुआ है, लेकिन न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी और लंबित मामलों की बढ़ती संख्या से आम आदमी को न्याय मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अदालतों में 5 करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनमें से कई मामले सालों से लंबित हैं। इससे न्याय की समयबद्ध उपलब्धता प्रभावित होती है और गरीब और जरूरतमंद लोगों के अधिकारों का हनन होता है।

उन्होंने कहा, “न्याय तभी सच्चा होता है जब वह समय पर मिले। अन्यथा, देरी से मिला न्याय, न्याय न मिलने के बराबर होता है।”

न्यायिक व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव

CJI ने कुछ बिंदुओं पर जोर दिया: डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया जाए ताकि मुकदमों की सुनवाई और फैसलों में पारदर्शिता और तेजी आ सके। मध्यस्थता (मेडिएशन) और वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) को बढ़ावा दिया जाए। अदालतों में मानव संसाधन और तकनीकी सुविधाओं में सुधार किया जाए।
जजों की नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज की जाए और रिक्त पदों को भरा जाए।
कानूनी साक्षरता को बढ़ावा दिया जाए ताकि लोग अपने अधिकारों और न्यायिक प्रक्रियाओं को समझ सकें।

युवाओं को दी सीख: ईमानदारी को प्राथमिकता दें

दीक्षांत समारोह में उपस्थित ग्रेजुएट छात्रों को संबोधित करते हुए CJI गवई ने कहा कि जीवन में तरक्की पाने के लिए सिर्फ डिग्री या पद ही मायने नहीं रखते, बल्कि ईमानदारी और नैतिक मूल्यों पर टिके रहना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, “जब आप जीवन में किसी को अपना गुरु चुनें, तो उसकी शक्ति, उसका रसूख या उसका ओहदा देखकर नहीं, बल्कि उसकी ईमानदारी और उसूल देखकर चुनें।” CJI ने कहा कि आज समाज को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो बदलाव का माध्यम बन सकें और अपने करियर में ईमानदारी और निष्ठा के साथ आगे बढ़ सकें।

छात्रों में दिखा उत्साह

कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राओं में CJI के संबोधन को लेकर उत्साह दिखा। छात्रों ने कहा कि वर्तमान समय में जब करियर और सफलता की दौड़ में लोग शॉर्टकट अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में मुख्य न्यायाधीश का ईमानदारी और उसूलों पर टिके रहने की सीख प्रेरणादायक है।

न्याय व्यवस्था की चुनौतियां

भारत की न्याय व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है: लंबित मुकदमे: बढ़ती जनसंख्या और विवादों में वृद्धि के कारण अदालतों में मुकदमे बढ़ते जा रहे हैं। जजों की कमी: अदालतों में जजों के पद खाली रहने से मामलों की सुनवाई में देरी होती है। तकनीकी सुविधाओं की कमी: कई अदालतों में अब भी डिजिटल सिस्टम और ई-कोर्ट की सुविधाएं पूरी तरह नहीं पहुंची हैं। वित्तीय सीमाएं: न्यायपालिका को मिलने वाला बजट सीमित है, जिससे संरचनात्मक और तकनीकी विकास में बाधा आती है।

सरकार और न्यायपालिका का साझा दायित्व

CJI गवई ने कहा कि न्यायपालिका में सुधार सरकार और न्यायपालिका दोनों का साझा दायित्व है। उन्होंने कहा कि अदालतों में बुनियादी ढांचे और संसाधनों के विकास के लिए सरकार को निवेश बढ़ाना चाहिए ताकि मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके। उन्होंने कहा कि न्यायिक सुधार के लिए जजों की संख्या बढ़ाना, अदालतों में ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और डिजिटल रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्थाएं तेजी से लागू करना जरूरी है।

 

न्याय’ को न्याय दिलाने की जरूरत

CJI गवई ने अपने भाषण में कहा कि भारतीय संविधान में न्याय को सबसे ऊपर रखा गया है और हमें संविधान की आत्मा को जिंदा रखने के लिए न्याय प्रणाली में समयानुसार सुधार लाने होंगे। उन्होंने कहा, “हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं और यहां न्यायपालिका लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है। अगर लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास कम होता है, तो लोकतंत्र कमजोर पड़ जाएगा।”

युवाओं के लिए संदेश

CJI ने युवाओं से कहा कि देश के भविष्य निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी अगर न्याय व्यवस्था और समाज में सुधार के लिए काम करेगी, तो भारत में न्याय को समय पर और प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराया जा सकेगा।

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे करियर चुनते समय समाज सेवा और राष्ट्र सेवा को प्राथमिकता में रखें। उन्होंने कहा कि लॉ ग्रेजुएट्स को भी चाहिए कि वे वकालत के क्षेत्र में ईमानदारी और सच्चाई को अपनाएं ताकि न्याय दिलाने में उनकी भूमिका सशक्त हो सके।

 

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