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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सांगानेर में 300 बेड के हॉस्पिटल की सौगात दी

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सादिक हिंदुस्तानी

सांगानेर/जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। बहुत पुरानी एक कहावत है  “पहला सुख निरोगी काया” यदि मानव जाति का स्वास्थ्य ठीक है तो समझो उसका पूरा जीवन सार्थक है। वरना इस जीवित शरीर में बहुत-सी बीमारियां घर कर जाती हैं और जीवन बहुत ही कष्टदायक हो जाता है। स्वास्थ्य कैसे ठीक रहे इसके लिए सरकार के द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जाते हैं। सांगानेर की जनता दशकों से एक सपना देखती चली आ रही थी कि सांगानेर में एक सरकारी उच्च स्तरीय अस्पताल हो, जो सर्व सुविधा संपन्न हो जिसमें सांगानेर क्षेत्र की जनता का फ्री कॉस्ट इलाज हो। तो यह सपना हकीकत में साकार होने जा रहा है।

  • अथक प्रयास और दूरदर्शिता से हुए कामयाब

सांगानेर में 300 बेड का हॉस्पिटल जो निर्माण होने जा रहा है उसका सही मायने में क्रेडिट भजनलाल शर्मा को जाता है। जोकि सांगानेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं और राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री हैं। यह उनकी अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता के लिए बहुत बड़ी सौगात है। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा यह मामला उन्होंने अपने अथक प्रयास और दूरदर्शिता से शीघ्र ही हल करवाने में सफलता हांसिल  की ।

  • दशकों पुराना सपना अब पूरा होने जा रहा है

सांगानेर की जनता जनार्दन की मांग अब पूरी होने जा रही है। एक बहुत बड़ी सौगात मिलने जा रही है। सांगानेर की संस्थाएं, समाजसेवी, बुद्धिजीवी एवं मीडिया काफी दिनों से मुद्दा उठाते आ रहे थे कि सांगानेर की खुली जेल में हजारों वर्ग फीट पड़ी जमीन अनुपयोगी है। वहां पर सांगानेर का जिला अस्पताल बनना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सांगानेर की जनता का सपना अब होगा अपना।

  • यह पेचीदा मामला काफी दिनों से पेंडिंग था

यह मामला काफी पुराना है। धीरे-धीरे पेचीदा होता जा रहा था। सन 2015 में तत्कालीन सरकार ने सांगानेर सामुदायिक चिकित्सालय को पीपीपी मॉडल पर देने के आदेश दिए थे। जिसके खिलाफ स्थानीय नागरिकों ने, सांगानेर नागरिक विकास मंच, बुद्धजीवी, समाजसेवी,जनसंगठनों ने इसका प्रतिरोध कर संघर्ष किया और विधानसभा पर जोरदार प्रदर्शन किया। जिसके फलस्वरुप सरकार को अपना आदेश वापस लेना पड़ा।

  • सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा मामला

इससे पूर्व राज्य सरकार ने सांगानेर के बंबाला में अस्पताल के लिए भूमि आवंटित कराई थी। इसका सांगानेर की जनता ने विरोध किया एवं खुली जेल के लिए सुझाव दिया और सरकार ने खुली जेल में भूमि आवंटित भी कर दी। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में प्रसून गोस्वामी ने एक याचिका दायर की, उसे मंजूर कर ली गई एवं राज्य सरकार के मुख्य सचिव पर अवमानना का केस दायर कर दिया गया।

  • यह था मामला

दरअसल अवमानना याचिका में कहा था कि खंडपीठ ने 17 मई 2024 के आदेश से राज्य सरकार को ओपन जेल की जमीन को कम नहीं करने और 6 दशक से ओपन जेल के लिए काम आने वाली जमीन को संरक्षित करने के लिए कहा था। लेकिन जेडीए ने 30 जुलाई 2024 को ओपन जेल की इस जमीन पर सेटेलाइट हॉस्पिटल का आवंटन मंजूर कर लिया। राज्य सरकार व जेडीए का यह करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना माना गया।

  • क्या आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवंबर 2024 को रजिस्टार को जमीन का निरीक्षण करने एवं जेल शिफ्टिंग की संभावना जांचने का आदेश दिया था। इस मामले में रजिस्टार ने 6 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश थी। इसमें कहा गया है कि मौजूदा जेल को शिफ्ट करना संभव है। रजिस्टार ने सुझाव दिया कि 17800 वर्ग मीटर और अतिरिक्त 14940 वर्ग मीटर जमीन का उपयोग नई जेल बनाने के लिए किया जाये। बाकी 22232 वर्ग मीटर जमीन पर सेटेलाइट हॉस्पिटल का निर्माण किया जाए।

  • किन-किन ने की सुनवाई

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश बी.आर गवई एवं जस्टिस ऑगस्टिन मासिह की बेंच ने की। राज सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने पक्ष रखा। जबकि याचिकाकर्ता प्रसून गोस्वामी की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और न्याय मित्र के तौर पर के परमेश्वरन मौजूद रहे।

  • कोर्ट ने सरकार को दिया निर्देश जनता की क्या रही प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने कोर्ट में हल्फनामा दायर कर रजिस्ट्रार की सभी सिफारिशों का पालन करने की बात कही है। जेल परिसर एवं सैटेलाइट हॉस्पिटल्स का निर्माण चरणबद्ध तरीके से निर्माण किया जाएगा। सांगानेर की जनता 300 बेड के अस्पताल की मंजूरी मिलने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्वागत बंधन एवं अभिनंदन करती है और आशा करती है कि आगामी वर्षों में सांगानेर का चौमुखी विकास निश्चित है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दिखावा नहीं हकीकत पसंद करते हैं। उनके कार्यकाल में विकास के नाम पर सांगानेर प्रथम स्थान पर रहेगा। अभी तो यह शुरुआत है। धैर्य रखिए बहुत कुछ बदलने वाला है।

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