पंजाब बाढ़ पीड़ितों को केंद्रीय सहायता अभी तक नहीं!
देश में यह पहली बार सामने आया है कि देश के किसी प्रांत में बाढ़ से भारी तबाही होने के बाद भी केंद्र सरकार और देश के प्रधानमंत्री ने कोई राहत पैकेज की घोषणा नहीं की है। पंजाब में बाढ़ ने जितनी तबाही मचाई है, इतिहास में इतनी तबाही बाढ़ से पंजाब में कभी नहीं हुई। पंजाब के हजारों गांव बाढ़ के पानी से डूब गए, खेतों में खड़ी किसानों की फसलें बर्बाद हो गई। पानी का भाव इतना गहरा और तेज था कि पंजाब से लकड़ी, भूसा, पालतू जानवर सहित अन्य वस्तुएं बहकर पाकिस्तान चली गई। बहकर जाने वाली चीजों में कीमती लकड़ियां और भैंसों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है। पंजाब में तबाही के चलते 34 लोगों की जान चली गई और सैकड़ो लोग घायल हैं। लोगों के रहने के लिए बने घर पानी में डूब गए और पानी के तेज बहाव से नष्ट हो गए। बाढ़ पीड़ित लोगों को बिना घर के दिन-रात गुजारना पड़ रहा है। खाने, पहनने की वस्तुएं या तो बाढ़ के पानी में बह गई या फिर खराब हो गई। पंजाब के पड़ोसी राज्यों के लोग अनाज, रोटी, सब्जी और कपड़े ले जाकर पंजाब के बाढ़ पीड़ितों को दे रहे है। लेकिन आचार्यजनक रूप से देश के प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार ने पंजाब या फिर किसी अन्य बाढ़ पीड़ित राज्य के लिए बाढ़ राहत सहायता की घोषणा नहीं की है। यह देश में पहली बार हो रहा है कि देश के भीतर अपने ही लोगों के लिए केंद्र सरकार कोई राहत पैकेज घोषित नहीं कर रही है। ऐसा लगने लगा है कि प्रधानमंत्री किसान आंदोलन से नाराज हैं। प्रधानमंत्री का गुस्सा अभी तक शांत नहीं हुआ है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को सोचना चाहिए कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं। देश के मालिक हैं। देश के सभी नागरिक उनके लिए समान होने चाहिए। देश के जनता की सुरक्षा प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल की जिम्मेदारी है। पंजाब देश का एक महत्वपूर्ण राज्य है। जिसमें सिक्ख धर्म के लोगों की बहुसंख्या की जनसंख्या है। पंजाब के सिक्खो ने देश को आजाद करवाने में बहुत कुर्बानियां दी हैं। देश की आजादी में सिक्खो का बलिदान स्वर्ण अक्षरों में लिखा हुआ है। पंजाब के लोग बहुत बहादुर और साहसी हैं। बाढ़ आपदा के बाद वह जल्दी संभल जाएंगे। बाढ़ से हुए नुकसान को सह भी लेंगे। लेकिन केंद्र सरकार का सौतेला व्यवहार हमेशा उनको याद रह सकता है। भारत सरकार से पंजाब की जनता को सहायता मिलना उनका अधिकार है। बुरे वक्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई स्टेटमेंट या कोई ट्वीट सामने नहीं आया है। देश का पूरा विपक्ष प्रधानमंत्री की आलोचना कर रहा है देश की जागरूक जनता को भी ऐसा व्यवहार ठीक नहीं लग रहा होगा। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को पंजाब में अपने नागरिकों को बचाने और उन्हें राहत देने के लिए तुरंत एवं बड़े पैमाने पर कार्यवाही शुरू करनी चाहिए।
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