खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोबिंद सिंह जी का 359वां प्रकाश पर्व मनाया
श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा राजापार्क गुरुद्वारा
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजधानी जयपुर के राजापार्क स्थित गुरुद्वारे में गुरु गोबिंद सिंह जी का 359वां प्रकाश पर्व मनाया गया। संपूर्ण देश और दुनिया में खालसा पंथ के संस्थापक, दशमेश पिता, महान योद्धा-संत गुरु गोबिंद सिंह जी का यह प्रकाश पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
विशेष गुरमत समागम का आयोजन
आज के पावन अवसर पर गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, राजापार्क में विशेष गुरमत समागम का आयोजन किया गया।
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नितनेम पाठ: सुबह 5 बजे से 6:30 बजे तक नितनेम का पाठ हुआ।
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कीर्तन: इसके पश्चात 7:30 बजे से ‘आसा की वार’ का मधुर कीर्तन चला। सचखंड श्री हरमंदिर साहिब से आए रागी जत्थों द्वारा गुरुवाणी का कीर्तन संगत को निहाल कर रहा है।
गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन और संदेश
गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब में हुआ था। वे सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु थे। उन्होंने अपने जीवन को धर्म, मानवता, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के लिए समर्पित कर दिया।
खालसा पंथ और बलिदान
गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर समाज को एक नई दिशा दी। उन्होंने समानता, साहस और आत्मसम्मान का संदेश दिया।
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प्रसिद्ध उद्घोष: उनका उद्घोष— “सवा लाख से एक लड़ाऊँ, तभी गोबिंद सिंह नाम कहाऊँ” आज भी हर सिख के हृदय में जोश और बलिदान की भावना भर देता है।
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साहिबजादों का त्याग: गुरु साहिब ने अपने चारों साहिबजादों का बलिदान देकर यह सिद्ध कर दिया कि धर्म और इंसाफ की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर करना ही सच्ची सेवा है।
लंगर सेवा और संकल्प
इस अवसर पर गुरुद्वारे में लंगर सेवा का आयोजन भी किया गया, जहाँ जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर सभी ने एक साथ पंक्तिबद्ध होकर गुरु का लंगर ग्रहण किया।
प्रकाश पर्व के मौके पर संगत ने ‘वाहेगुरु’ के जयकारों के साथ गुरु गोबिंद सिंह जी के बताए मार्ग पर चलने, सत्य और न्याय के लिए खड़े रहने तथा मानवता की सेवा का संकल्प लिया। अंत में अरदास के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया और समस्त विश्व में शांति, भाईचारे और सद्भावना की कामना की गई।
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