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शख्सियत

जयपुर

यह लेख 'सीरत-उन-नबी' (पैगंबर मुहम्मद साहब की जीवनी) की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि कैसे पैगंबर साहब का जीवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि न्याय, निष्पक्षता और नैतिकता का व्यावहारिक उदाहरण है। लेख में विशेष रूप से कानून के शासन, महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, शत्रुओं के प्रति क्षमाशीलता और मातृभूमि के प्रति प्रेम (देशभक्ति) जैसे विषयों को उजागर किया गया है। अंत में, यह… Read More

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया: आखिर क्यों कहलाए “मेहबूब-ए-इलाही”?

जयपुर

यह लेख सूफी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के जीवन की एक प्रमुख घटना का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे उनके गुरु बाबा फरीद ने उनसे पूछा कि वे 'मुहिब' (प्रेमी) बनना चाहते हैं या 'मेहबूब' (प्रिय)। अपनी माँ की सलाह पर जब वे एक मज़जूब (फकीर) के पास पहुंचे, तो उस मज़जूब ने मृत्यु के बाद उन्हें 'मेहबूब' बनने की सलाह दी ताकि दुनिया उन्हें इज़्ज़त…

मौलाना मोहम्मद अली जौहर: कलम, क़ुर्बानी और क़ौमी एकता की ज़िंदा मिसाल

जयपुर

यह लेख भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि कैसे उन्होंने ऑक्सफोर्ड से पढ़ने के बावजूद अंग्रेजों के खिलाफ 'कॉमरेड' और 'हमदर्द' अखबारों के जरिए विद्रोह का बिगुल फूंका। लेख में खिलाफत आंदोलन में उनकी भूमिका और हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए उनके प्रयासों का वर्णन है। सबसे महत्वपूर्ण, इसमें उस वाकये का जिक्र है…

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शहीद अशफाक उल्ला खान:

जयपुर

यह लेख भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद अशफाक उल्ला खान के जीवन और बलिदान पर आधारित है। इसमें उनके प्रारंभिक जीवन, शाहजहांपुर से शुरू हुए उनके सफर, और राम प्रसाद बिस्मिल के साथ उनकी गहरी दोस्ती का वर्णन है। लेख का मुख्य हिस्सा 1925 के ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन (डकैती) पर केंद्रित है, जिसके कारण उन्हें ब्रिटिश सरकार ने 27 वर्ष की अल्पायु में 19 दिसंबर 1927 को फांसी…

पूनम अंकुर छाबड़ा के जन्मदिन पर होटल रमाडा में भव्य आयोजन:

जयपुर

जयपुर: शराब बंदी आंदोलन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम अंकुर छाबड़ा का जन्मदिन शनिवार को जयपुर के होटल रमाडा में समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की मेजबानी अंकुर छाबड़ा ने की। इस मौके पर ग्रेट रियलिटी प्लस फैसिलिटीज मैनेजमेंट के निदेशक मोहम्मद आसिफ दाऊदी ने विशेष रूप से उपस्थित होकर पूनम छाबड़ा को बधाई दी। समारोह में केक काटने के बाद डिनर का आयोजन किया गया, जिसमें परिवार और मित्रों ने हिस्सा…

मिर्ज़ा ग़ालिब (1797-1869):

नई दिल्ली

नई दिल्ली/आगरा: मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान उर्फ 'मिर्ज़ा ग़ालिब' (27 दिसंबर 1797 - 15 फ़रवरी 1869) उर्दू और फ़ारसी के महानतम शायर थे। आगरा के एक सैन्य परिवार में जन्मे ग़ालिब ने 13 साल की उम्र में शादी के बाद दिल्ली को अपना घर बनाया। वे अंतिम मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि थे और उन्हें 'दबीर-उल-मुल्क' और 'नज़्म-उद-दौला' जैसे खिताब मिले। ग़ालिब अपनी अनूठी शैली (अंदाज़-ए-बयाँ) और…

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यूसुफ़ खान उर्फ दिलीप कुमार:

मुंबई

मुंबई: भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार (मूल नाम: यूसुफ खान) का जीवन एक सिनेमाई किंवदंती है। पेशावर (अब पाकिस्तान) में जन्मे दिलीप कुमार ने 'ज्वार भाटा' से अपने करियर की शुरुआत की और 'मुगल-ए-आज़म', 'गंगा जमुना', 'देवदास' और 'शक्ति' जैसी ऐतिहासिक फिल्में दीं। उन्हें भारत में 'मेथड एक्टिंग' का जनक और 'ट्रेजिडी किंग' कहा जाता है। 6 दशकों के करियर में उन्हें दादा साहेब फाल्के, पद्म विभूषण और…

फेस नेशनल हेल्थ अवार्ड 2025:

नई दिल्ली

नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में 'फेस नेशनल हेल्थ अवार्ड 2025' का आयोजन किया गया, जिसमें स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्थान के बारां से पूर्व वक्फ कमेटी चेयरमैन माजिद सलीम को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सांसद मौलाना मोहिब्बुल्लाह नदवी और दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त अजय चौधरी समेत कई गणमान्य लोग…

मोहम्मद अली जौहर:

जयपुर

परिचय: मोहम्मद अली जौहर (1878-1931) एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापक सदस्य थे। शिक्षा व पत्रकारिता: ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई के बाद उन्होंने 'द कॉमरेड' और 'हमदर्द' अखबारों के जरिए आजादी की आवाज बुलंद की। राजनीतिक सफर: वे खिलाफत आंदोलन के मुख्य नेता थे और 1923 में कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने, लेकिन बाद में वैचारिक मतभेदों के कारण कांग्रेस से अलग हो गए। ऐतिहासिक प्रतिज्ञा:…

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इब्ने अरबी: वहदत अल-वुजूद और रूहानी विज्ञान के महानायक

जयपुर

यह लेख 12वीं सदी के प्रसिद्ध सूफी विद्वान, दार्शनिक और कवि इब्ने अरबी (शेख अल-अकबर) के जीवन और दर्शन पर आधारित है। स्पेन में जन्मे इब्ने अरबी ने 'वहदत अल-वुजूद' (अस्तित्व की एकता) का सिद्धांत दिया, जो मानता है कि कण-कण में ईश्वर का वास है। उन्होंने 'अल-फुतुहात अल-मक्किया' जैसी विशाल ग्रंथ की रचना की। लेख में उनके द्वारा प्रतिपादित 'इंसान-ए-कामिल' की अवधारणा और आधुनिक विज्ञान (वर्महोल) के साथ उनके…

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