सांचौर जिला निरस्त करने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, सरकार से मांगा जवाब
ग्रामीणों का धरना लगातार जारी
सांचौर, (रॉयल पत्रिका)। सरकार द्वारा सांचौर जिला खत्म करने के विरोध में सांचौर संघर्ष समिति का धरना लगातार जारी है। धरनार्थियों ने कहा कि जब तक हमारा जिला वापस नहीं मिलता तब तक ये धरना जारी रहेगा। हर दिन अलग-अलग गांव के ग्रामीणों द्वारा धरना स्थल पर पहुंच कर प्रतिदिन उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन दिया जा रहा है। जिसमें अधिक से अधिन संख्या में ग्रामीणों व किसानों का सहयोग मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सांचौर से जालौर की दूरी अधिक होने की वजह से किसान मजदूर वर्ग को जिला स्तर का कार्य करने में अत्यधिक बांधा आ रही है। सरकार सांचौर की जनता के साथ भेद भाव कर रही है। उन्होंने सांचौर जिले को पुनःबहाल करने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रैली निकाल कर सरकार की आलोचना की।” सरकार को चेतावनी देते हुए बताया कि जब तक सरकार जिला बहाल नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जबकि वर्तमान सरकार द्वारा कौनसे आधार पर जिलों को निरस्त किया गया कोई स्पष्ट नहीं है। सांचौर जिला बनने से जिला मुख्यालय नजदीक होने पर आमजन के लोगों के सभी जिले स्तर के कार्य जल्द होने लगे व आर्थिक बोझ भी ज्यादा नहीं रहा। सांचौर जिला निरस्त करके सांचौर की जनता के साथ अन्याय किया है। अब सांचौर की जनता ने कोर्ट की शरण ली है। अब जिला रद्द करने के मामले में कोर्ट से उम्मीद है कि हमारे साथ न्याय होगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के धरने का असर होना शुरू हुआ है। सरकार ने सांचौर में एडीएम कार्यालय खोला है, लेकिन हम जिला कलेक्टर बैठने से पहले कोई समझौता नहीं करेंगे। सांचौर जिले को किस आधार पर निरस्त किया गया। यह सरकार क्यों नही बता पा रही है। सूचना के अधिकार में जानकारी मांगने पर गोपनीय होने का हवाला देते हुए सूचना देने से मना किया जा रहा है। यह सरकार की हठधर्मिता है, ऐसी हठधर्मिता किसी भी सुरत में बर्दाशत नहीं की जाएगी। पटेल मोहम्मदशाह, पीराराम देवासी फालना, केशाराम मेहरा, किशनलाल देवासी, हकीमशाह, जयराम सुथार, देवाराम भील, सुल्तानशाह, रवाराम गर्ग, नारायण मेघवाल, भरत भाटीया विरोल, छगनलाल, रमेश देवासी वड्सम, अमलुराम सारण, दिनेश सारण, वगाराम सारण, किशनलाल लोल सहीत कई ग्रामीण उपस्थित थे।
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