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क्या भारत में कोई नेता ज़ोहरान ममदानी जैसा हो सकता है?

जयपुर

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न्यूयॉर्क सिटी में ज़ोहरान ममदानी की जीत

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी में 34 वर्षीय मुस्लिम उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी ने मेयर पद का चुनाव बड़े अंतर से जीता है। अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश में न्यूयॉर्क जैसे महत्वपूर्ण शहर का मेयर बनना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

ज़ोहरान ममदानी ने मेयर पद का चुनाव तब जीता है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनका खुला विरोध किया और बड़े पूंजीपतियों ने ममदानी को हराने के लिए बड़ा फंड खर्च किया। न्यूयॉर्क सिटी की जनता, जिसमें ईसाई, मुस्लिम, हिंदू और अन्य सभी ने ममदानी को समर्थन दिया, सिर्फ यहूदी वर्ग ने ममदानी का विरोध किया। ज़ोहरान ममदानी एक डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट हैं, वह पूंजीपतियों के खिलाफ हैं।

अमेरिका का मॉडल

अमेरिका में अमेरिका के हितों की बात करने वाले बुद्धिमान एवं निडर लोगों को बहुत पसंद किया जाता है। अमेरिका विकसित और शक्तिशाली देश दूसरे देशों से आए ब्रेन इंपोर्ट (Brain Import) से बना है। अमेरिका में धार्मिक पक्षपात, भ्रष्टाचार जैसे हानिकारक तत्व बड़ी मात्रा में चलन में नहीं हैं, वहां योग्य लोगों का खुलकर स्वागत किया जाता है।

भारत देश में ममदानी जैसा नेता हो सकता है?

भारत देश जनसंख्या के लिहाज़ से विश्व का सबसे बड़ा देश है। भारत की जनता ने भी योग्य, बुद्धिमान एवं मेहनती लोगों को दिल से स्वीकार किया है। चाहे वह किसी भी धर्म, समुदाय, वर्ग, जाति और नस्ल का व्यक्ति रहा हो। भारत एक सेक्युलर देश है और देश की बहुसंख्यक जनता देश के सेकुलर ताने-बाने को पसंद करती है।

भारतीय इतिहास में योग्यता का सम्मान

आपकी जानकारी के लिए भारत में धर्म और समुदाय की परवाह किए बिना योग्यता को स्वीकार करने के कई उदाहरण हैं:

  • डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (मुस्लिम): ‘मिसाइल मैन’ के नाम से जाने जाते थे, भारत के महान वैज्ञानिकों में शामिल थे और देश के राष्ट्रपति भी रहे।
  • डॉ. जाकिर हुसैन (मुस्लिम): 1967-1969 तक देश के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति रहे।
  • डॉ. मनमोहन सिंह (सिख): 2004 से 2014 तक देश के लगातार दो बार प्रधानमंत्री रहे। भारत की अर्थ-व्यवस्था को उदारीकरण की दिशा में ले जाने वाले प्रमुख अर्थ-शास्त्री थे।
  • मारग्रेट अल्वा (ईसाई): गोवा की राज्यपाल रहीं।
  • जेआरडी टाटा (पारसी): टाटा पारसी धर्म के व्यक्ति थे और भारत की औद्योगिक क्रांति में उनका बड़ा योगदान है।

इसी तरह सेना, विजिलेंस, खेल, शिक्षा, राजनीति में भी बड़ी संख्या में हिंदुओं के अलावा दूसरे धर्मों के लोग हैं, जो उच्च स्तर और उच्च पदों तक पहुंचे हैं।

निष्कर्ष

इसलिए कहा जा सकता है कि भारत में भी कोई योग्य, बुद्धिमान, मेहनती और भारत के हित की बात करने वाला व्यक्ति भी विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, जज, वैज्ञानिक, खिलाड़ी और बिजनेसमैन बन सकता है। देश में वर्तमान सरकार का चेहरा देश का चेहरा नहीं है। देश में भाजपा चुनाव जीत कर सत्ता संभाल रही है। भाजपा की विचारधारा देश की विचारधारा से कुछ अलग हो सकती है, लेकिन देश के लिए योगदान देने वालों को वह रोक नहीं सकती है।

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